How to invest in the market crash in India ?

दोस्तों फर्स्ट सेप्टेम्बर 1939 को जर्मनी ने पोलैंड पे अटैक किया और फिर अगले कुछ ही महीनों में नॉर्वे, हॉलैंड और बेल्जियम ने भी जर्मनी के सामने सरेंडर कर दिया और फिर मैं 1940 को जर्मनी ने फ्रांस जैसी पॉवरफुल कंट्री पे अटैक किया और तब यूएस का डो जोन्स स्टॉक इंडेक्स 40% नीचे गिर गया था,
जो उस टाइम का सबसे लोवेस्ट रेकोर्ड था। सब लोग डर रहे थे कि जर्मनी इसके बाद शायद यूके पे भी अटैक करेगी और ये एक बहुत ही बड़ी वोर में कन्वर्ट हो सकती है क्योंकि इससे यूरोपियन कन्ट्रीज में बहुत ज्यादा केऑस फैल गया था।
लाखों लोग बेघर हो गए थे। लोग अपने देश को छोड़कर दूसरी कंट्री में जा रहे थे। सिर्फ अपनी कीमती चीजें जैसे गोल्ड और सिल्वर लेके अपनी जान बचाने की कोशिश कर रहे थे। तो ऐसे टाइम पे किसी इन्वेस्टर को कैसे रिऐक्ट करना चाहिए? तो दोस्तों तब एंट्री होती है सर जॉन टेंपलटन की, जो उस टाइम पे इतने फेमस और अमीर नहीं थे। लेकिन उन्होंने कुछ ऐसा किया जिसकी वजह से आज ये दुनिया के सबसे रिस्पेक्टेड इन्वेस्टर्स में से एक माने जाते हैं और इन्होंने जो इन्वेस्ट किये उसको लोग बट ऑफ द सेंचुरी कहते हैं। अब तो इन्होंने ऐसा किया किया इसको हम
आगे ब्लॉग में काफी डिटेल में समझेंगे क्योंकि फिलहाल हमारी जेनरेशन में भी कुछ सिमिलर चीजें हो रही है। जैसे रशिया ने यूक्रेन पे अटैक किया है जो अभी तक यूरोप की हिस्टरी की वर्ल्ड टू के बाद सबसे बड़ी वोर मानी जाती है और किसी भी वक्त एक वर्ल्ड वॉर शुरू हो सकता है
क्योंकि ऑलरेडी इसमें काफी सारी कंट्रीज़ इन्वॉल्व हो चुकी है। अब 200 फ्यूचर में क्या होगा? वो तो हमें फ्यूचर में पता चलेगा, लेकिन सवाल ये उठता है कि इन सब सिचुएशन में हमें अपने इन्वेस्टमेंट्स करने कैसे चाहिए?
क्योंकि ऐसे टाइम पे प्रॉफिट कमाना तो दूर, लोग अपना कैपिटल भी सेव नहीं कर पाते तो इन्हीं चीजों को हम आज के वीडियो में समझेंगे। कि आप ऐसी वोर और क्राइसिस की सिचुएशन में कहाँ और कैसे अपनी वेल्थ को प्रोटेक्ट करने के साथ अच्छा प्रॉफिट कमा सकते हो? तो दोस्तों सबसे पहला ऑप्शन हम मेजोरिटी इंडियन्स के दिमाग में आता है, वो है फिक्स्ड
डिपॉजिट। इसका एडवांटेज यही है की चाहे मार्केट कितना भी ऊपर या नीचे उतारा है, आपको एक फिक्स्ड रेट का इंट्रेस्ट मिलता रहेगा। इसकी आपको बैंक की तरफ से गैरन्टी मिलती है
लेकिन लोग इन्ट्रेस्ट के साथ इसका डिसएडवांटेज ये भी है कि बैंक में जो आप अपना पैसा सेव करते हो, सेविंग्स अकाउंट में या एफडी में तो वो भी रिस्की हो सकता है क्योंकि बैंक भी शायद कभी बंद हो सकती है या फ्रॉड कर सकती है।
क्योंकि अलटिमेटली बैंक प्रॉफिट बनाने वाली कंपनी होती है और ये लॉस में भी जा सकती है और खास करके जब कंट्री किसी क्राइसिस या वर्ड के सिचुएशन में पढ़ती है तो तब अनएम्प्लॉयमेंट बढ़ता है तो जब बैंक के पास पैसे होंगे ही नहीं तो वो लोगों को
अपने डिपॉजिट से रिटर्न करेंगे। कैसे? तो बिल्कुल वही टाइम पे जो आप चाहते हो की बैंक्स आपकी मदद करे और आप के रिस्क को कम करे। ये क्राइसिस और वोर के टाइम पे और ज्यादा रिस्की हो सकते हैं।
फिर दोस्तों, इसके बाद दूसरा ऑप्शन आता है बॉन्ड। अब इन्वेस्टिंग की दुनिया में सबसे सेफ इन्वेस्टमेंट जीसको कहा जाता है तो वो है गवर्नमेंट बॉन्ड ज़ क्योंकि गवर्नमेंट चाहे कितनी भी बुरी सिचुएशन में जाए या लॉस में चले जाएं,
अगर उनके पास पैसे नहीं हैं तो हमें कभी भी नोट्स प्रिंट करके पैसा दे सकती है क्योंकि उन्हीं के पास नोट्स प्रिंट करने की मशीन होती है। लेकिन कभी कभी ऐसी सिचुएशन आ जाती है जहाँ गवर्नमेंट भी बैंक करप्ट हो जाती है।
मतलब उनके पास भी कोई वैल्युएबल, करेन्सी या रिसोर्स नहीं होते पब्लिक को या दूसरी कन्ट्रीज को देने के लिए जैसे की आप जानते हो हमारी पड़ोसी कन्ट्रीज श्रीलंका ने अपने लाखों स्टूडेंट्स के एग्जाम कैंसिल किये क्योंकि उनके पास पेपर नहीं थे
एग्ज़ैम लेने के लिए और उन्होंने ऑनलाइन एग्ज़ैम लेने के लिए कोई तैयारी नहीं की थी क्योंकि श्रीलंका खुद अपनी कंट्री में पेपर को प्रोड्यूस नहीं करती है।
वो दूसरे देशो से उसे इम्पोर्ट करती है और वो फिलहाल काफी बुरी तरह कर्जे में डूबी है क्योंकि उन्होंने पहले ही दूसरी कन्ट्रीज से बहुत सारा लोन ले रखा है। अब अगर आपको ये चीज़ नहीं समझ आई तो मैं आपको एक दम सिंपल लैंग्वेज में
एक्सप्लेन करता हूँ, इमेजिन करो एक आदमी है, जीसको जॉब से निकाल दिया गया है तो आप इसका कोई भी इनकम का सोर्स नहीं है,
लेकिन उसके खर्चे तो होते रहेंगे जैसे उसे खाने पीने की चीजों की जरूरत होगी और कपड़े पहनने के लिए भी चाहिए होंगे तो उसी तरह श्रीलंका की इनकम ग्रोथ नहीं हो रही है
क्योंकि उनका मेजोरिटी इनकम टुरिज़म से आता है, जो फिलहाल दो तीन सालों से कुवैत की वजह से लॉस में तो गवर्नमेंट अपनी कंट्री के लोगों की मदद करने के लिए
ज़्यादा नोट्स प्रिंट तो कर सकती है, लेकिन अगर कोई चीज़ मार्केट में अवेलेबल है ही नहीं या उसकी शॉर्टेज है तो उससे फिर मार्केट में महंगाई बढ़ती है।
जैसा कि आप देख सकते हो श्री लंकन रूपी की वैल्यू इंडियन रूपी और यूएस डॉलर के मुकाबले कितना स्पीड में गिर गयी है तो बॉन्ड का इंट्रेस्ट रेट फिक्स होता है।
लेकिन ऐसे टाइम पे जब क्राइसिस या बोर की कंडीशन स्टार्ट होती है तो महंगाई काफी स्पीड में बढ़ जाती है। जैसे 2030% से तो जो लोग गवर्नमेंट बॉन्ड में इन्वेस्ट करते हैं उसे सेव समझ के और गवर्नमेंट उनको उनके इंट्रेस्ट रेट के हिसाब से पेमेंट दे भी दें तो भी वो उस दो 4% की इंटरेस्ट की कुछ वैल्यू होगी नहीं।
तो इसीलिए जब भी हम बोरो क्राइसिस की बात करते हैं तो एक बहुत ही पॉपुलर इन्वेस्टमेंट लोगों के दिमाग में आता है, वो है गोल्ड। 1000 साल पहले भी यूज़फुल था और 1000 साल बाद भी ये यूज़फुल रहेगा।
इसका सबसे बड़ा एडवांटेज ये है की गोल्ड का स्टॉक मार्केट और इकोनॉमी से को रिलेशन हमेशा ऑपोजिट रहता है। मतलब अगर आप पिछले 100, 200 या 1000 सालों का डेटा ट्रैक करोगे तो
जब भी स्टॉक मार्केट या इकोनॉमिक क्रैश हुई है तो गोल्ड का प्राइस हमेशा ऊपर गया है और लॉन्ग टर्म में गोल्ड का प्राइस हमेशा ऊपर जाता रहता है। लेकिन इसका सबसे बड़ा डिसएडवांटेज ये है कि लॉन्ग टर्म में
हमें इससे सिर्फ सात 8% का ही रिटर्न मिलता है जो कंट्री की लॉन्ग टर्म जितना होता है और दूसरा डिसएडवांटेज ये है की अगर आपको गोल्ड से अच्छा रिटर्न कमाना है तो इसमें टाइम इन बहुत बड़ा रोल प्ले करता है।
अगर आप बिल्कुल किसी वोर या क्राइसिस के पहले गोल्ड को बी करते हो तो आपको शॉर्ट टर्म में अच्छा प्रॉफिट मिल सकता है। लेकिन वैसे इवेंट्स को ऐडवान्स में प्रिडिक्ट करना नेक्स्ट इम्पॉसिबल होता है। किसी ने सपने में भी सोचा नहीं होगा की
कुवैत जैसा एक वायरस पूरी दुनिया में इतनी प्रॉब्लम क्रिएट करेगा या इस 20 फर्स्ट सेंचुरी में किसी यूरोपियन कंट्री को कोई ऐसे अटैक करेगा या जब वर्ल्ड टू के 60 में जापान ने यूएस के पर्ल हार्बर पे अटैक किया था तो वो भी एकदम अचानक से हुआ था। तो वोर्स हमेशा एकदम अचानक से शुरू होते जो एक बहुत ही बेसिक लेवल की मिलिट्री स्ट्रैटिजी होती है।
आप नहीं चाहोगे की आपकी जो भी दुश्मन है वो किसी तरह की कोई तैयारी करें। और जब रशिया ने यूक्रेन पे अटैक किया था तो सबको ऐसा ही लग रहा था की एक 2 दिन में ही रशिया यूक्रेन को पूरी तरह कंट्रोल कर लेगी।
लेकिन अब इसे एक महीने होने आये और किसीको पता नहीं कौन जीतने वाला है तो इसीलिए वर्ड्स को प्रेरित करना या उनके आउटकम को प्रेरित करना, ये सब नेक्स्ट इम्पॉसिबल होता है। तो ऐसे टाइम पे आपको ज्यादा ओवर थिंग करने की जरूरत नहीं है।
और गोल्ड में एक बड़ा अमाउंट इन्वेस्ट करना भी इतना सेंसिबल होगा नहीं, क्योंकि लॉन्ग टर्म में इससे आपका कैपिटल ज्यादा ग्रो होता नहीं है और शॉर्ट टर्म में आप ऐसे इवेंट्स का पता लगा पाओगे? नहीं तो इसीलिए गोल्ड आपकी वेल्थ को प्रोटेक्ट करने का अच्छा ऑप्शन हो सकता है।
लेकिन ग्रो करने के लिए आपको एक अच्छा ऑप्शन चुनना होगा, क्योंकि क्या आपने कभी ऐसा सुना है की किसी इंसान ने गोल्ड में इन्वेस्ट करके अपनी वेल्थ क्रिएट की हो तो इसीलिए आप अपनी एमर्जेंसी फंड का एक हिस्सा गोल्ड में रख सकते हो ताकि अगर आपको वोर और क्राइसिस के बीच Emergency फंड्स की रिक्वायरमेंट होती है तो आप उसे अच्छे प्राइस पे सेल करके अपनी नीड पूरी कर सकते हो।
फिर तो उसको इसके बाद नेक्सट इन्वेस्टमेंट ऑप्शन आता है। स्टॉक्स अभी उसको वो राइस के टाइम पे लोग हमेशा अपने स्टॉक सेल करने का सोचते और इसीलिए ऐसे टाइम पे इनका प्राइस बहुत बुरी तरह फ्लक्चूएट होता रहता है।
जैसे जब रशिया ने अटैक किया था तो इंडियन स्टॉक मार्केट उस दिन 5% नीचे गया था जबकि इंडिया का उस वो ओर से कुछ भी लेना देना नहीं था। तो यही स्टॉक मार्केट का सबसे बड़ा डिसएडवांटेज है की ये न्यूज़ को लेकर काफी ज्यादा सेंसिटिव होता है।
लेकिन तो यही इसका सबसे बड़ा एडवांटेज भी होता है। तो आइये हम यहाँ पे सर जॉन टेंपलटन की स्टोरी को कंप्लीट करते जब 1939 में
जर्मनी ने पोलैंड पर अटैक किया था और फिर धीरे धीरे बाकी यूरोपियन कन्ट्रीज में भी सरेंडर किया था तो एक बात जॉन टेंपलटन को समझ में आ गयी थी की ये सिचुएशन काफी आसानी से एक वर्ल्ड वॉर में बदल सकती है
और इसमें यूएसबी एंटर कर सकती है और तब उन्होंने यूएस, यूके और दूसरी कन्ट्रीज की इकोनॉमी और वहाँ की कम्पनीज़ को ऐनालाइज करना शुरू किया और फिर उन्होंने ये पता लगाया की सबसे ज्यादा फायदा उस वोर में जीसको होगा तो वो ही यूएस और यूएस में सबसे ज्यादा फायदा किसको होगा?
तो वो है उनकी स्मॉल कैप कम्पनीज़ क्योंकि वो ओर के टाइम पे भी लोगों को बहुत सारी चीजों की जरूरत होती रहती है।
तो यूरोपियन कम्पनीज़ ऑपरेट नहीं कर रही थी, क्योंकि पूरा यूरोप एक जंग का मैदान बन चुका था तो भले ही यूएस वोर में एंटर कर लें और उसे हार जाएं, लेकिन फिर भी जो भी यूरोपियन कंट्री वो जीतेगी तो उनको काफी ज्यादा नुकसान हो चुका होगा।
तो जो नेक्सट बेस्ट कंट्री है वो यूएस जो मैक्सिमम गुड्ज़ प्रोड्यूस कर सकती थी और पूरी कंट्री में सप्लाई कर सकती थी क्योंकि उनके पास उतनी कपैसिटी थी और टेक्नोलॉजी भी और यूएस के पास लोकेशन ऐडवांटेज भी था।
वो यूरोप से एक अच्छे डिस्टैन्स पे भी थी और यूएस का फिजिकल साइंस ऑलमोस्ट पूरे यूरोप की कॉन्टिनेंट जितना बड़ा है, जिसकी वजह से
यूएस को पूरी तरह डिस्ट्रॉय करना काफी ज्यादा मुश्किल होगा। और तब जॉन ने बिल्कुल मार्केट क्रैश के बीच वॉल स्ट्रीट जर्नल की मैगज़ीन ओपन की और यूएस की कंपनी इसको स्टडी करना शुरू किया और उन्हें पता चला की यूएस की स्मॉलकैप कंपनी का स्टॉक प्राइस बहुत ज्यादा बुरी तरह क्रैश हो चुका है और ऑलमोस्ट सारे स्टॉक्स एकदम सस्ते प्राइस पे सेल हो रहे हैं
तो उन्होंने अपने ब्रोकर को कॉल किया और उसने कहा की जितनी भी यूएस की स्मॉलकैप कंपनी से जो $1 से नीचे के प्राइस पे सेल हो रही है वो उन सब में 100 $100 इन्वेस्ट करना चाहते हैं। तो उनकी ब्रोकर ने कहा कि यह एक बहुत ही अजीब ऑर्डर है।
लेकिन क्योंकि वो उनके कस्टमर है तो उसे जरूर कंप्लीट करेंगे। फिर जॉन ने उन स्टॉक्स को भरोसे के साथ होल्ड करके रखा और उसके बाद वोर और ज्यादा इन्टेंस हो गया। जापान ने डाइरेक्टली यू एस के पर्ल हार्बर पे अटैक किया और फिर यूएस ऑफिशियली वोर में एंटर हो गई और वो टाइम पे ऑलमोस्ट पूरा यूरोप हिटलर के कंट्रोल में था।
फिर भी जॉन ने अपने शेयर्स को होल्ड करके रखा और फाइनली सेकंड सितंबर 1945 को यूएस वो जीता और जिन कंपनीज के स्टॉक में उन्होंने इन्वेस्ट किया था वो कम्पनीज़ काफी अच्छा प्रॉफिट कमाने लगी क्योंकि जैसा उन्होंने प्रेरित किया था की यूएस की छोटी कंपनी इसको ज्यादा बिज़नेस मिलेगा।
बिल्कुल वैसा ही हुआ और क्योंकि उन्होंने बिल्कुल वॉर के बीच में इन्वेस्ट किया था तो उनको वो कम्पनीज़ काफी चीप प्राइस में मिली थी।
जैसे कंपनी थी मिजोरी पैसिफ़िक रेल रोड, जिसको उन्होंने सिर्फ 12 के प्राइस पर खरीदा था और कुछ ही सालों में उसका शेयर प्राइस $105 में ग्रो हो गया था, जो होता है 875 टाइम्स का रिटर्न मतलब 87,500% का रिटर्न। तो जॉन टेंपलटन की
इसी फिअरलेस इन्वेस्टमेंट ने उन्हें काफी अच्छी वेल्थ क्रिएट करके दी और उनको इन्वेस्टिंग की दुनिया में एक अलग रिस्पेक्ट मिली क्योंकि उनके उसी इन्वेस्टमेंट को बहुत लोग बैठ
ऑफ द सेंचुरी कहते। तो इसीलिए जब भी वोर और क्राइसिस होते हैं तो आपको हमेशा एक ब्रॉड पिक्चर देखना होगा। वो जीतना या हारना इतना इम्पोर्टेन्ट नहीं है।
हमारे लिए इम्पोर्टेन्ट ये है की कौन सी कंट्री और कौन सी कंट्री के कौन से स्पेसिफिक स्टॉक्स उस सिचुएशन से फायदा उठा सकते हैं क्योंकि अलटिमेटली हम इंसानों को गुड्स और सर्विस की जरूरत होती रहेंगी तो उसे कोई ना कोई कंपनी या कोई ना कोई कंट्री प्रोवाइड करती रहेंगी तो फिर चाहे किसी कंट्री के सारे बैंक्स बंद हो जाए या कन्ट्रीज की गवर्नमेंट पूरी तरह बदल जाए। कम्पनीज़ अगर ऐसे प्रोडक्ट्स सेल करती है जिसका डिमांड लोग कर रहे हैं।
तो वो कैसी भी सिचुएशन में सर्वाइव कर लेगी। जैसे इंडिया में ये सारी कंपनीस पिछले 100 150 सालों से चलती आ रही है। जब हमारी कंट्री में ब्रिटिश इस थे ये कंपनीस तब स्टार्ट हुई थी और अभी तक सक्सेस्स्फुल्ली रन हो रही है। तो इसीलिए अब मल्टिपल कन्ट्रीज की कंपनी में इन्वेस्ट करके अपनी वेल्थ को डाइवर्सिफाइ भी कर सकते हो और उसे प्रोटेक्ट भी।
और अगर आप इंडिया के अलावा किसी दूसरी कंट्री की बात करते हो तो हम इंडियन्स के लिए नंबर वन ऑप्शन होता है। यूएस स्टॉक्स जैसे पिछले 80 सालों से स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करते आ रहे हैं और उन्होंने कभी भी गोल्ड में या किसी दूसरी कंट्री में कुछ खास इन्वेस्टमेंट किया ही नहीं है।
क्योंकि वो अपनी कंट्री में बिलीव करते। पिछले 80 सालों में यूएस ने काफी सारी वो उसमें पार्टिसिपेट किया है लेकिन फिर भी वो अपनी कंपनी में इनवेस्टेड रहे और करते रहेंगे क्योंकि वो हमेशा इन्फ्लेशन प्रूफ और वॉल प्रूफ कंपनीस में इन्वेस्ट करते जो 1020 साल तो क्या लाइफ टाइम में भी कभी बंद नहीं हो सकती।
ऐसी कम्पनीज़ जिनका मैनेजमेंट गवर्नमेंट या बिना किसी सपोर्ट के खुद बिज़नेस कर सकता है, जैसे वर्ड वर्ड टू के टाइम कोका कोला ने स्ट्रेटेजी यूज़ करके मिलिट्री और गवर्नमेंट ऑफिशियल्स को डिस्काउंट पे कॉक देना शुरू किया, जिससे उनका सेल्स बढ़ने लगा। लेकिन फिर इसे देख के बाकी अमेरिकन लोगों ने भी
कुक और ज्यादा कौन सी एम करना शुरू किया देश के लिए अपना पैट्रीअटिज़म शो करने के लिए जिससे उनका सेल्स और बढ़ने लगा और यही वो टाइम था जब कोका कोला यूएस मार्केट से ग्रोह ओके पूरी वर्ल्ड को अपनी ड्रिन्क्स डिस्ट्रीब्यूट करने लगी।
तो मैनेजमेंट के ऐसे कन्टिन्यूअस फोकस की वजह से एक कंपनी पिछले 5060 सालों से इतने सारे वर्ड्स के बीच भी अपने शेयर होल्डर्स को कन्टिन्यूअस डिविडेंड देती आ रही है।
और दोस्तों आज 20 फर्स्ट सेंचुरी में हमारी बेसिक नेसेसिटीज़ और ज्यादा ग्रो हो चुकी है। अब हमें इन्टरनेट भी चाहिए होता है। मोबाइल भी और उसमें एक न्यूस और कन्टेन्ट वाला ऐप भी
जैसे गूगल या यूट्यूब। तो इसीलिए बहुत लोग मुझसे पूछते है की वो यूएस स्टॉक्स में इन्वेस्ट कैसे कर सकते हैं तो उसके लिए अब वेस्टेड का मोबाइल ऐप यूज़ कर सकते हो जहा से ये इंटरनेशनल इन्वेस्टिंग का पूरा प्रोसेसर काफ़ी ईज़ी होता है
क्योंकि अभी रिसेंटली इन्होंने एक बहुत ही अच्छा फीचर ऐड किया है जहाँ से हम बहुत ही आसानी से यूपीआइ के जरिये अपने यूएस अकाउंट में फंड ज़ैड कर सकते हैं।
वरना पहले आपको एक फिक्स ट्रांसफर फी चार्ज होती थी और उसके साथ में 2% तक की करेन्सी एक्स्चेंज फी अलग लगती थी। लेकिन अभी वेस्ट डायरेक्ट के थ्रू आपको कोई भी फिक्स्ड फी चार्ज नहीं होती है और आपकी करेन्सी 1.2% के फिक्स्ड रेट में एक्स्चेंज होती है, जो मार्केट में लोवेस्ट थे।
और इसके साथ में उन्होंने एक और फीचर ऐड किया है जहाँ आप इस डी वेस्ट के सेक्शन में जाके अपना खुद का एक पोर्टफोलियों बना सकते हो।
जैसे मैं यहाँ पे एग्जाम्पल के लिए ये तीन कंपनी ऐड कर लेता हूँ और फिर आप अपनी मर्जी के हिसाब से अपना ऐलोकेशन सेलेक्ट कर सकते हो की किस में आपको कितना इन्वेस्ट करना हैं तो फिर जब भी आप इसे बाई करते हो तो आपका वो अमाउंट जैसे आप $50 से भी शुरुआत कर सकते हो तो वो ऑटोमैटिकली इन कंपनीस में इन्वेस्ट होता है
आपके एजुकेशन के हिसाब से और फिर आप इसको अपने फ्रेंड के साथ शेयर भी कर सकते हो और इसका परफॉर्मेन्स यूएस के इन्डेक्स एट 05:00 100 से कंपेर भी कर सकते हो, तो आपका यू एस इन्वेस्टिंग का पूरा प्रोसेसर ईज़ी करने के लिए
यह एप बनाया गया है। इसकी लिंक आपको नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी। अब वहाँ जाके इसे चेक कर सकते हो तो दोस्तों फाइनली जॉन टेंपलटन की यहाँ पे एक लाइन में कोट करता हूँ के द बेस्ट वे फॉरेन इन्वेस्टर्स टु प्रॉफिट ड्युरिंग क्राइसिस इस नॉट टु फोकस ऑन द करंट सिनारियो बट उनके करेंट वैल्यू क्योंकि अगर सच में कभी फ्यूचर में एक बहुत बड़ी वोर हो जाती है,
जिससे ऐक्चुअली में सब कन्ट्रीज एक दूसरे पर नुक्लेअर बोम्ब से अटैक करने लगती है तो तब तो कोई भी नहीं बचेगा तो आपके पैसे वैसे भी आपको कुछ काम आयेगी नहीं। लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है और जब वो रो क्राइसिस खत्म होता है तो उस दौरान जो ज्यादा नोट्स प्रिंट किए जाते हैं
वो रोल क्राइसिस को फाइनैंस करने के लिए और उससे बचने के लिए तो उस का सारा इफेक्ट और प्रॉस्पेरिटी का इफेक्ट भी एक साथ स्टॉक के प्राइस में शो करता है और स्टॉक प्राइस काफी स्पीड में ऊपर जाते है।
तो इसीलिए दोनों ही सिचुएशन में वोर और क्राइसिस से हमें ज्यादा टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। अगर आप हमें इंसानों की हजारों सालों की हिस्टरी रीड करोगे तो आपको पता चलेगा की ये वोर्स और क्राइसिस हमेशा से होते आ रहे हैं।
फिर भी इकोनॉमिक ग्रोथ होती रहती है और लोग बिज़नेस करते रहते हैं। बस गवर्नमेंट और करेन्सी चेंज होती रहती है।
लेकिन बिज़नेस तो हमेशा चलते रहेंगे और बिज़नेस मैन हमेशा अमीर बनते रह गए तो उस तो आज के वीडियो में इतना ही उम्मीद करता हूँ कि आपको इस वीडियो से कुछ ना कुछ सीखने जरूर मिला होगा। आप लोग मुझे नीचे कमेंट करके बताओ की आपके पोर्टफोलियों में कौनसी कंपनी है जो वोर प्रूफ और इन्फ्लेशन प्रूफ है।
ब्लॉग पसंद आया तो इसे लाइक करो, नहीं पसंद आया तो डिस्लाइक करो। आपका वैल्युएबल टाइम देने के लिए थैंक यू ऐंड गुड बाइ I

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