Index fund vs Mutual Fund vs ETF vs SIP How To Invest First

Index fund vs Mutual Fund vs ETF vs SIP How To Invest First

दोस्तों, काफी सारे लोग Investment तो शूरू करना चाहते है लेकीन उनको ये म्यूचुअल फंड, इन्डेक्स फंड, ईटीएफ और डायरेक्ट स्टॉक इनवेस्टिंग में क्या फर्क होता है? एक बिगनर के लिए क्या बेस्ट होगा? तो इसीलिए आज हम इनके कॉन्सेप्ट को समझेंगे और ये जाएंगे कि आपके लिए कौन सा बेस्ट है, जहाँ से आप कम से कम रिस्क लेंगे। सबसे ज्यादा प्रॉफिट कमा सकते हो और दोस्तों हम इन चार ऑप्शन को एक दूसरे से कंपेर भी करेंगे और एकदम सिंपल लैंग्वेज में समझेंगे की एक बिगनर इन्वेस्टर को जिसको स्टॉक मार्केट की कोई भी नॉलेज नहीं है अगर वो सीरियसली इन्वेस्ट करना चाहता है।

Equity Vs Debt

अपने लाखों रुपये की सेविंग को तो उसे कहाँ इन्वेस्ट करना चाहिए ? क्योंकि दोस्तों ये सब लगती है एक जैसे लेकिन इनमें काफी ज्यादा फर्क होता है। छोटी छोटी चीज़े होती है जो लोगों को शुरू में पता नहीं होती है लेकिन काफी सारे लोग बात समझ आती है जब उनका ऑलरेडी बहुत बड़ा लॉस हो चुका होता है क्योंकि दोस्तों स्टॉक मार्केट में एक छोटी छोटी गलतियों से भी बहुत बड़े नुकसान हो सकते। जो मैं आप लोगों को समझ आ जाएगा तो इसीलिए ये एक Post आपके लिए बहुत ही इम्पोर्टेन्ट होने वाला है।

इसे एंड तक जरूर देख लेना तो दोस्तों सबसे पहले हम इन चारों के सिमिलैरिटीज को डिस्कस करते कि इनमें क्या क्या चीजें सम होती है? तो ये चारों इन्वेस्टमेंट्स के थ्रू आप स्टॉक मार्केट में इन्वेस्ट करते हो तो इनमें आपको कोई गैरैन्टी नहीं दे सकता कि फ्यूचर में आपको कितना रिटर्न मिलेगा और दूसरी चीज़ ये है कि अगर कभी मार्केट क्रैश होता है और आपको वही टाइम पैसों की जरूरत होती है तो वहाँ पे आपको लॉस भी हो सकता है।

लेकिन जहाँ हम बात करते हैं दूसरे इन्वेस्टमेंट्स की जैसे फिक्स्ड डिपॉजिट यू लीव या कोई रेग्युलर इनकम प्लैन तो वहाँ पे आपको गैरन्टी रिटर्न मिल सकता है, जैसे पांच छेह, सात या 8% तक का आपको रिटर्न मिलता है और स्टॉक मार्केट के क्रैश होने पे भी आपका लॉस नहीं होता है। तो फिर सवाल ये उठता है कि लोग इन सब में इन्वेस्ट करते क्यों हैं? तो इसका जवाब ये है की अगर हमारी इकोनॉमी फ्यूचर में ग्रो होती है, जो पिछले 50-60 साल से होती आ रही है तो FD के इन्वेस्टर्स को उनका 5-8 परसेंट का ही रिटर्न मिलेगा।

लेकिन यहाँ पे इन इन्वेस्टर्स को काफी अच्छा रिटर्न मिल सकता है, जैसे 10% – 15%  या 20% तक या उससे भी ज्यादा। और इस छोटे से फर्क से लॉन्ग टर्म में काफी ज्यादा फर्क पड़ता है। जैसे हर नोर्मल्ली इंसान को यही लगेगा कि जो इन्वेस्टर्स 8% के रेट से पैसा ग्रो कर सकता है और कोई दूसरा इन्वेस्टर 16% के रेट से अपना पैसा ग्रो कर सकता है, तो 16% वाली की वेल्थ लॉन्ग टर्म में आठ वाली से डबल होगी।

जैसे ₹1,00,000 30 साल में 8% के रेट से टैक्स में ग्रो होता है, तो जिनको कंपाउंड नहीं पता उनको लगेगा कि 16% वाले इनवेस्टर्स की वेल्थ सिर्फ 20,00,000 की होगी, लेकिन रिऐलिटी में 16% के रेट से 1,00,000 रूपया वही पीरियड में 85 लाख में ग्रो होता है तो ये 16% भले 8% का सिर्फ डबल है

लेकिन ऐक्चूअली में पैसों के मामले में ये इससे और आठ गुना ज्यादा है। दोगुना नहीं और जैसे जैसे टाइम निकलता रहेगा तो ये डिफरेन्स और ज्यादा होता रहेगा। तो जिनको कंपाउंडिंग का मैजिक नहीं पता है तो वो लोग हमेशा कोई गैरन्टी देने वाले इन्वेस्टमेंट्स ही चुनेंगे और बैंक्स इसका फायदा उठाते रहेंगे और ऐसी स्कीम सेल करते रहेंगे।

तो इसीलिए इन चारों ऑप्शन का सबसे मेन बेनिफिट ये है कि लॉन्ग टर्म में आप कंपाउंडिंग के पावर से बहुत अच्छी वेल्थ क्रिएट कर सकते हो। इस कंपाउंडिंग के मैजिक के ऊपर मैंने एक डिटेल विडीओ ऑलरेडी बनाया है। आपको नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा। तो दोस्तों अब हम ये समझते हैं कि इन चारों में फरक क्या है? तो ये जो बीच के दो ऑप्शंस हैं।

Differences

इनमें आपको मार्केट का ऐवरेज रिटर्न मिलता है। मतलब जीतने रेट से सेंसेक्स और निफ्टी ग्रो होता है, आपको उतना ही रिटर्न मिल सकता है। जैसे पिछले 40 साल के रिकॉर्ड के हिसाब से सेंसेक्स 15% के रेट से ग्रो हुआ है। तो अगर फ्यूचर में सेंसेक्स वही रेट से ग्रो होता है तो ये इंडेक्स फंड और ईटीएफ इन्वेस्टर्स को उतना ही रिटर्न मिल सकता है। लेकिन ये कोर्नर के दो इन्वेस्टर्स को सेंसेक्स और निफ्टी से ज्यादा भी रिटर्न मिल सकता है या उससे कम भी रिटर्न मिल सकता है। फिर दूसरा डिफरेन्स ही है की ये तीन ऑप्शन्स मैं आपको एक रेडीमेड डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियों मिलता है

तो इनमें एक कॉमन बेनिफिट ये है की जीसको स्टॉक मार्केट में ही इन्वेस्ट करना है। लेकिन पता नहीं कौनसा स्टॉक लेना चाहिए तो वो इन तीनों में से कोई एक ऑप्शन चुन सकता है। ये म्यूचुअल फंड, इन्डेक्स फंड और ईटीएफ कभी भी बैकअप नहीं होते तो यहाँ पे आपके पूरे पैसे डूबने की चान्स बिल्कुल भी नहीं है। अगर मार्केट क्रैश भी होता है और हमारी कंट्री बहुत बुरी सिचुएशन में पढ़ती है तो ये मैक्सिमम 50-60 परसेंट तक नीचे जाते और रिकवर भी कर लेते है।

जैसे पिछले साल की वजह से ये इन्डेक्स 40% नीचे गया था, लेकिन जल्दी से रिकवर भी हो गया, तो अगर आप वो टाइम पे पेशेंट्स के साथ इनवेस्टेड रहोगे तो आपका ऐक्चुअली में कुछ लॉस होगा नहीं और दोस्तों, म्यूचुअल फंड और इंडेक्स फंड में आपको कोई भी डीमैट और ट्रेनिंग अकाउंट ओपन करने की जरूरत नहीं होगी। आपका पैसा कंपनी के स्टॉक में इन्वेस्ट होता है, लेकिन एक ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी के थ्रू जैसे एचडीएफसी म्यूचुअल फंड या ऐक्सिस म्यूचुअल फंड कंपनी तो या तो आप अपने इन्वेस्टमेंट डाइरेक्टली इन ए एम सी के थ्रू कर सकते हो या फिर आप इसको भी किसी थर्ड पार्टी इन्वेस्टमेंट ऐप से कर सकते हो।

जैसे अब Upstox या Zerodha या Angel ब्रोकिंग तो अगर आप अपस्टॉक्स के साथ म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हो तो पहले आपका पैसा अपस्टॉक्स के पास जाएगा। फिर वो फौरन उसे म्यूचुअल फंड कंपनी को पहुंचाएंगे जैसे एचडीएफसी म्यूचुअल फंड और फिर 2 दिन के बाद आपको कंफर्मेशन मिलेगा।

क्या आपका पैसा स्टॉक्स में इन्वेस्ट हो चुका है और आपको यूनिट्स मिलते हैं और तब जाके आपका पैसा डाइवर्सिफाइड स्टॉक्स के पोर्टफोलियों में इन्वेस्ट होता है। लेकिन यहाँ पे ईटीएफ और स्टॉक्स में आप किसी ब्रोकर के थ्रू इन्वेस्ट कर सकते हो क्योंकि अगर मुझे पता है कि मुझे कौन से स्टॉक में इन्वेस्ट करना हैं  या कौन से इंडेक्स में इन्वेस्ट करना है तो मैं डाइरेक्टली वहाँ इन्वेस्ट करूँगा। एक ब्रोकर के थ्रू जैसे मेरा Zerodha और Angel ब्रोकिंग के साथ है।

Open Demat Account

तो अगर आपको स्टॉक्स में इन्वेस्ट करने के लिए एक इन्वेस्टमेंट अकाउंट ओपन करना है तो उसका लिंक आपको नीचे मिल जाएगा। आप वहाँ से डाइरेक्टली अपना अकाउंट ओपन कर सकते हो क्योंकि फिलहाल इनका एक ऑफर चल रहा है जहाँ से आप फ्री में अपना डीमैट अकाउंट ओपन कर सकते हो और उसी एक ऐप के थ्रू आप अपने म्यूचुअल फंड्स और स्टॉक इन्वेस्टमेंट भी कर सकते हो। लेकिन दोस्तों डायरेक्ट स्टॉक में आप थोड़ा सा ज्यादा रिस्क लेते हो, क्योंकि आपका पैसा एक स्पेसिफिक कंपनी में इन्वेस्ट होता है।

जो बैनक्राफ्ट हो सकती है जैसे येस बैंक, वोडाफोन। तो फिर सवाल ये उठता है कि लोग स्टॉक्स में इन्वेस्ट करते क्यों हैं? तो इसका असर काफी सिंपल है। डायरेक्ट स्टॉक में आपको मल्टीबैगर रिटर्न मिल सकते हैं। जैसे 10 साल में आपका पैसा 10 गुना ग्रो हो सकता है तो ये 26% का ग्रोथ रेट होता है। और अगर आपका इन्वेस्टमेंट अगले 10 साल के लिए यही रेट से ग्रो होता है तो फिर आपका इन्वेस्टमेंट सौदागरों हो सकता है। क्योंकि शुरू के 10 साल में आप का ₹1 ₹10 में ग्रो होता है और उसके बाद के 10 साल में आपका ₹10 ₹100 में ग्रो होता है। यही कंपाउंडिंग का मैजिक है। जिसका डायरेक्ट स्टॉक इन्वेस्टर्स फायदा उठाते हैं,

Why Most People Invest In Mutual Fund ?

तो फिर उसको सवाल ये उठता है कि लोग म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट क्यों करते हैं? तो सबसे पहले हम इसके एडवांटेज को समझने की कोशिश करते हैं तो दोस्तों सच यह है कि म्यूचुअल फंड में ज्यादा लोग इसीलिए इन्वेस्ट करते क्योंकि आपने इसके काफी सारे टीवी पे ऐड देखे होंगे कि म्यूचुअल फंड सही है, रिटायरमेंट के लिए म्यूचुअल फंड कर लो, ये सबसे बेस्ट है, वगैरह वगैरह। तो ये म्यूचुअल फंड हम इंडियन्स के लिए सही इसीलिए है।

क्योंकि हम मेजोरिटी इन्डियन्स आज भी गोल्ड, रियल एस्टेट और एफडी को अच्छा इन्वेस्टमेंट मानते। अब रियल एस्टेट से आपको अच्छा रिटर्न मिल तो सकता है लेकिन उसमें आपको एक बहुत बड़ा अमाउंट इन्वेस्ट करना होता है। तो अगर आपको एक छोटा अमाउंट इन्वेस्ट करना हैं

जैसे अपनी सैलरी का 10% तो आप म्यूचुअल फंड में सिप कर सकते हो तो जो फंड मैनेजर होगा वो आपके लिए स्टॉक सिलैक्ट करेगा, आपके लिए पोर्टफोलियों बनाएगा और अच्छे रिटर्न्स कमा के देगा जिसके लिए वो सिर्फ 1-2 परसेंट की फीस आपसे लेगा। लेकिन 200 जब म्यूचुअल फंड से इतने अच्छे होते तो लोग इंडेक्स फंड में क्यों इन्वेस्ट करते हैं?

तो इसीलिए अब हम इसके डिसएडवांटेज को समझने की कोशिश करते हैं तो दोस्तों जब आप म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करने का प्लैन करते हो तो आप पता लगा ओके कैसे है कि कौन सा म्यूचुअल फंड बेस्ट है? क्योंकि जब आप स्टॉक्स को और इन तीनों को कंपेर करोगे तो नो डाउट स्टॉक्स में ज्यादा रिस्क होता है। लेकिन उसके लिए आपको बहुत सारी इन्फॉर्मेशन मिल जाती है

जैसे यहाँ पे मैं टिकट ऐप यूज़ कर रहा हूँ जो स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड को ऐनालाइज करने का एक प्लैटफॉर्म है। इसकी लिंक आपको नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी। तो अगर आप यहाँ पे कोई कंपनी पिक करते हो और कंपनी की ऐनुअल रिपोर्ट ओपन करते हो तो उससे आपको कंपनी की काफी सारी इन्फॉर्मेशन मिल जाती है।

फिर आपके पास कंपनी के इनवेस्टर प्रेजेंटेशन होते हैं और कंपनी के फाइनैंशल परफॉर्मेंस का रिकॉर्ड होता है। और उनकी ऐसी बहुत सारी इन्फॉर्मेशन आपको मिल जाती है। लेकिन जहाँ हम बात करते हैं किसी म्यूचुअल फंड की तो मैं यहाँ पे एक रैन्डम म्यूचुअल फंड पिक कर लेता हूँ तो हमारे पास म्यूचुअल फंड को ऐनालाइज करने के लिए बस यही सब डेटा अवेलेबल होता है।

जैसे इस म्यूचुअल फंड का पास परफॉर्मेन्स, फिर इनका एक्स्पेन्स रेशियो, पी रेशियो और शाप रेशियो। फिर हम इनके पोर्टफोलियों में कौन से स्टॉक्स है वो देख सकते हैं और फंड मैनेजर्स की डिटेल देख सकते हैं। लेकिन प्रॉब्लम ये है कि जब आप स्टॉक मार्केट में न्यू होते हो तो अब पता लगाओगे कैसे की ये सब डेटा ऐनालाइज हम कैसे करें? क्योंकि आप डायरेक्ट स्टॉक्स के मुकाबले म्यूचुअल फंड इसी लिए चुन रहे हो।

क्योंकि आपको फाइनैंस की इतनी नॉलेज नहीं है। ये शायद आपको एनालाइज करने के लिए इतना टाइम नहीं देना है। अगर इतना टाइम आपके पास होता तो शायद आप डाइरेक्टली स्टॉक्स में इन्वेस्ट कर लेते क्योंकि स्टॉक्स में तो आपको मल्टीबैगर रिटर्न भी मिल सकते हैं, लेकिन म्यूचुअल फंड्स मल्टीबैगर नहीं होते। तो इसीलिए जब आप म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हो तो आप इन फंड मैनेजर पे शर्त लगाते हो के फ्यूचर में ये वाला घोड़ा ज्यादा तेज भागेगा। लेकिन फंड मैनेजर्स के ऊपर बहुत सारी रिस्ट्रिक्शन होती है जिससे वह पूरे फ्रीडम के साथ स्टॉक सेलेक्शन कर पाते नहीं है।

Index Fund Vs ETF

तो इसीलिए ये इंडेक्स फंड और ईटीएफ का सबसे बड़ा बेनिफिट ये है की ये सिंपल होते हैं। क्योंकि इंडिया के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज में यानी एनएसई में ऑलमोस्ट 1500 स्टॉक सेल होते, लेकिन इंडिया में टोटल 2500 से भी ज्यादा म्यूचुअल फंड्स होते तो म्यूचुअल फंड इन्वेन्ट इसलिए किए गए थे कि लोगों को स्टॉक सिलैक्ट करने में ज्यादा टाइम वेस्ट ना करने पड़े।

लेकिन अब स्टॉक से ज्यादा हमारे पास म्यूचुअल फंड अवेलेबल है तो बेस्ट म्यूचुअल फंड को ढूंढने के चक्कर में बहुत लोग यूश़ूअली खराब जगह इन्वेस्ट कर लेते है या फिर बार बार म्यूचुअल फंड चेंज करते रहते हैं जिसमें वो एग्ज़िट फी और ज्यादा टैक्स पे करते और वो कंपाउंडिंग का मैजिक भी देख नहीं पाते और इसीलिए आज की तारीख में दुनिया के सारे स्मार्ट इन्वेस्टर्स आपको हमेशा कोई सिंपल पैसिव इन्वेस्टमेंट ही सजेस्ट करेंगे

जैसे इंडेक्स फंड या ईटीएफ, क्योंकि यहाँ पे आप किसी फंड मैनेजर पे नहीं बल्कि पूरी कंट्री पे बैठ लगाते हो के इंडियन इकोनॉमी ग्रो होगी तो यहाँ पे आप फंड मैनेजर रिस्क पूरी तरह निकाल देते हो क्योंकि यह इंडेक्स फंड और ईटीएफ भी एक म्यूचुअल फंड ही होते, लेकिन ये पैसिव म्यूचुअल फंड की कैटेगरी में आते हैं। मतलब यहाँ पे एक फंड मैनेजर तो होगा लेकिन उसका काम सिर्फ यही होगा। की वो किसी इंडेक्स को बस कॉपी करता रहे। जैसे सेंसेक्स, निफ्टी या फिर स्मॉल कैप या लार्ज कैप इंडेक्स वगैरह वगैरह। और इन इंडेक्स फंड्स की ऐड्वर्टाइज़िंग भी नहीं होती है और इसीलिए इनकी फीस बहुत ही कम होती है। लेकिन म्यूचुअल फंड की ऐड्वर्टाइज़िंग बहुत होती है जो आप ही के पैसों से की जाती है।

अब इसका मैं आप लोगों एक लिविंग सिंपल दिखा देता हूँ तो यहाँ पे मैं लार्ज कैप फंड लिख देता हूँ और इसमें से रेंडमली एक म्यूचुअल फंड सिलैक्ट कर लेता हूँ तो इसका एक्स्पेन्स रेश्यो आप देख सकते हो। ये 1.68% का है तो ये म्यूचुअल फंड  Sensex से हर साल 1.6% एक्स्ट्रा रिटर्न देगा, इसकी कोई गारंटी नहीं है। लेकिन ये 1.6% आपको चार्ज करते रहेगा, इसकी गैरैन्टी जरूर है। तो इसीलिए अगर हम इंडेक्स फंड की बात करेंगे तो इसका एक्स्पेन्स इश्यू सिर्फ ज़ीरो पॉइन्ट वन 5% का है, जो बहुत ही कम है। तो जीस रेट से सेंसेक्स या निफ्टी ग्रो होता है। उतना रिटर्न तो आपको यहाँ पे मिल ही जाएगा क्योंकि लॉन्ग टर्म में 1% से भी बहुत ज्यादा फर्क पड़ता है

जहाँ बात आती है इंडेक्स फंड और ईटीएफ के डिफरेन्स की तो इनमें फर्क सिर्फ यह है कि इंडेक्स फंड में आप रेसिपी कर सकते हो जिससे आपको डॉलर कॉस्ट एवरीथिंग का बेनिफिट मिलता है। जो मैंने इस Post में काफी डिटेल में एक्सप्लेन किया है क्योंकि ईटीएफ में आपको सिप करने नहीं मिलता है। लेकिन ईटीएफ का बेनिफिट ये है की आप इसमें लिव इन वेस्ट कर सकते हो अपने डीमैट अकाउंट के थ्रू क्योंकि इंडेक्स फंड में आपका ऑर्डर कंप्लीट होने के लिए आपको 2 दिन वेट करना पड़ता है। अगर आज मार्केट क्रैश होता है तो ईटीएफ यानी एक्सचेंज ट्रेडेड फंड के थ्रू आप निफ्टी को ऑलिव बी कर सकते हो और एटीएफ की फीस भी काफी कम होती है जिसे मैं यहाँ पे निफ्टी लिख देता हूँ और ईटीएफ पे क्लिक करता हूँ।

तो इनकी फीस ज़ीरो पॉइन्ट 05% की होती है, जो म्यूचुअल फंड की सारी कैटेगरीज में सबसे मिनिमम होती है। तो अगर आपको स्टॉक्स में इन्वेस्ट करना हैं लेकिन आपके पास टाइम या एक्सपिरियंस नहीं है तो आप डाइरेक्टली निफ्टी या सैक्सबी कर सकते हो क्योंकि देखते ही देखते Sensex 63,000 तक पहुँच गया है और यह कुछ ही सालों में 1,00,000 क्रॉस भी कर देगा। तो जिनको सिप करना है उनके लिए इन डे क्स्प्न बेस्ट है और जो कभी कभी इन्वेस्ट करते हैं उनके लिए ईटीएफ सही होगा और जो सो आप में से कुछ लोग कहेंगे की सर मुझे एक यूट्यूबर ने बेस्ट म्यूचुअल फंड सजेस्ट किया है।

उस म्यूचुअल फंड ने पिछले 3 साल में 30% का रिटर्न दिया है तो म्यूचुअल फंड से ऐसे एक्स्पेक्टेशन रखना गलत होगा क्योंकि लॉन्ग टर्म में वो ऐसे एक्स्ट्राऑर्डिनरी रिटर्न्स दे नहीं सकते क्योंकि दोस्तों कैपिटलिज़्म का नेचर ये है कि जहाँ भी ज्यादा प्रॉफिट होता है तो सब लोग वही पे इन्वेस्ट करते हैं। तो अगर कोई फंड मैनेजर एक्चुअली मैं बहुत स्मार्ट होता है और लॉन्ग टर्म तक अच्छा रिटर्न देता है तो पहली बात तो ये है की आप उसे जल्दी पहचान नहीं पाओगे, लेकिन जब उस फंड मैनेजर ने ऑलरेडी एक अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड शो कर दिया है तो उनका एयूएम यानी ऐसेट अंडर मैनेजमेंट बढ़ जाएगा।

मतलब ज्यादा लोग उसमें इन्वेस्ट करने लगेंगे तो उस फंड मैनेजर को और भी ज्यादा अच्छे अच्छे स्टॉक्स ढूंढने होंगे जो बहुत ही मुश्किल होगा। तो इससे होगा ये कि पिछले 10 साल का बेस्ट फंड अगले 10 साल का सबसे बुरा फंड बन जाएगा। तो इसीलिए सिर्फ और सिर्फ हाई क्वालिटी कम्पनीज़ ही अच्छे रेट से लॉन्ग टर्म तक ग्रो हो सकती है क्योंकि उन कंपनीज़ के पास पुलिस या कोई होता है जिससे वो अपने कॉम्पिटिशन से बचते रहते हैं जिसके ऊपर हम आने वाले Blog में काफी डिटेल में डिस्कस करेंगे।

तो इसीलिए अगर आप स्टॉक मार्केट में न्यू तो आपको कोई मल्टीबैगर स्टॉक या बेस्ट म्यूचुअल फंड ढूँढने की जगह पे सिंपल स्ट्रेटेजी यूज़ करना चाहिए और अगर फ्यूचर में आप थोड़ा टाइम निकाल सकते हो तो आपको कंपनी की ऐन्युअल रिपोर्टस रेड करनी चाहिए और अपनी इन्वेस्टिंग की नॉलेज को इम्प्रूव करना चाहिए क्योंकि म्यूचुअल फंड के एक्स्पर्ट बन के आप को कुछ खास प्रॉफिट मिलेगा नहीं।

लेकिन कम्पनीज़ को ऐनालाइज करने के एक्स्पर्ट से आप काफी अच्छा रिटर्न कमा सकते हो। तो दोस्तों उम्मीद करता हूँ कि आपको इस Post से कुछ ना कुछ सीखने जरूर मिला होगा स्टॉक्स और म्यूचुअल फंड को खरीदने के लिए फ्री में इन्वेस्टमेंट अकाउंट ओपन करने का लिंक भी नीचे है और दोस्तों आप इस Post को शेयर करो अपने फ्रेंड्स और फैमिली के साथ जो इन्वेस्टमेंट करना चाहते हैं लेकिन कन्फ्यूज है और अब मुझे नीचे कमेंट करके बताओ की मैं कौन से टॉपिक पे अपना अगला Post बनाओ Blog पसंद आया तो इसे लाइक करो नहीं पसंद आया तो डिस्लाइक करो आपका वैल्युएबल टाइम देने के लिए थैंक यू ऐंड गुड बाइ.

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