Penny Stocks investing for Beginners in Stock Market

दोस्तों आज हम बात करने वाले पेनी स्टॉक्स के बारे में ये ऐसे स्टॉक्स होते हैं जो ₹2 से ग्रोह ओके ₹2000 के भी हो सकते हैं। मतलब बहुत कम इन्वेस्टमेंट पे आपको ज्यादा प्रॉफिट दे सकते हैं और इसके साथ में हम स्टॉक मार्केट के कुछ इम्पोर्टेन्ट कॉन्सेप्ट भी सीखेंगे जैसे स्टॉक्स प्लेस, मार्केट कैप और कंपनी के शेयर प्राइस बढ़ता या गिरता कैसे? तो अगर आपने ये ब्लॉग को एन्ड तक पढ़ लिया तो ये एक ब्लॉग बहुत लोगों के लिए आई ओपनर होने वाला है.

तो दोस्तों आप लोगों ने राकेश झुनझुनवाला का नाम तो सुना ही होगा जिसने इन्वेस्टिंग के जरिये काफी वेल्थ क्रिएट की है। और ये भी सुना होगा कि उसने अपनी लाइफ का सबसे बड़ा इन्वेस्टमेंट टाइटन कंपनी में किया है। उसने इस कंपनी में 2003 में इन्वेस्ट किया था। जब इस कंपनी का स्टॉक प्राइस ₹3 का था और आज इसका एक स्टॉक ₹3000 का मिल रहा है तो ये इन्वेस्टमेंट अभी तक 1000 गुना ऊपर जा चुका है। जैसा आप इस में देख सकते हो,   

आपको ऐसी बहुत सारी कहानी सुनने मिलती होगी कि अगर आप किसी कंपनी में सिर्फ कुछ ₹1000 इन्वेस्ट करते जब उस कंपनी का स्टॉक प्राइस दो रूपया या ₹5 रूपया का था, जैसे ये टाइटन कंपनी में तो आपने उससे काफी बड़ी वेल्थ क्रिएट कर ली होती. 

पैनी स्टॉक्स को ढूँढें कैसे ?

लेकिन प्रॉब्लम ये है कि हम ऐसे स्टॉक्स ढूँढें कैसे ? क्योंकि स्टॉक मार्केट में जो अच्छी कम्पनीज़ हैं उन सारी कंपनीस के शेयर्स अब ₹1000 के ऊपर होते तो क्या हम इन्वेस्टिंग में लेट हो गए? इन फैक्ट एक व्यूअर ने कमेंट में ये भी कहा कि सर आप जो भी स्टॉक्स के नाम लेते हो वो तो ₹1000 के ऊपर होते समटाइम्स आई फील वी आर लेट तो दोस्तों आज के ब्लॉग में मैं आप लोगों को यही इन्वेस्टिंग का सीक्रेट बताने वाला हूँ की कैसे? आप स्टॉक मार्केट के जरिये ऐक्चुअल वेल्थ क्रिएट कर सकते हो.

पैनी स्टॉक्स क्या है ?

तो सबसे पहले हम ये समझते हैं कि यह पैनी स्टॉक्स होते क्या है? तो जीस तरह इंडिया में रूपीस होता है। और ₹1 के आप 100 टुकड़े करोगे तो एक पैसा होता है, उसी तरह यूएस में डॉलर होता है और उसके अगर आप 100 टुकड़े करोगे तो एक पेनी होता है तो पैनी स्टॉक्स का मतलब होता है ऐसे स्टॉक्स जिनका प्राइस बहुत कम होता है। जैसे इंडियन मार्केट के हिसाब से दो रूपया ₹5 का एक स्टॉक और कुछ स्टॉक्स तो ऐसे भी होते हैं जिनका प्राइस ₹1 से भी कम होता है।

जैसे ये कंपनी का एक स्टॉक हमें 0.64 पैसे में मिल रहा है तो अगर आप इस कंपनी में ₹20,000 इन्वेस्ट करोगे तो आपको इस कंपनी का टोटल 1,00,000 शेयर्स मिलेगा। लेकिन प्रॉब्लम ये है कि हमें पता नहीं ये कंपनी का स्टॉक फ्यूचर में परफॉर्म कैसा करेगा।

और ये कंपनी कितने रेट से ग्रो हो सकती है? लेकिन फिर भी लोग ऐसे स्टॉक्स में इन्वेस्ट करते हैं तो मैक्सिमम लोग ऐसे स्टॉक्स में सिर्फ इसीलिए इन्वेस्ट कर लेते क्योंकि उनको एक साथ बहुत सारा शेयर्स खरीदने मिलता है।

क्योंकि अगर आप कोई अच्छी क्वालिटी कंपनी सेलेक्ट करते हो जैसे Nestle  इंडिया, जिसका एक शेर ₹17,000 का है और अगर आपको ₹20,000 इन्वेस्ट करना हैं तो आप इसका सिर्फ एक ही शहर खरीद पाओगे और इसमें तो कुछ मज़ा आएगा ही नहीं, क्योंकि एक स्टॉक से आपकी वेल्थ कैसे क्रिएट होगी और बहुत लोग ये भी सोचते हैं की ये स्टॉक ऑलरेडी बहुत महंगा हो गया है तो अब ये और कितना ऊपर जा सकता है ?

तो इस वजह से बहुत सारे बिगिनर्स पैनी स्टॉक चुन लेते क्योंकि उसमें उनको लगता है कि उनका बहुत बड़ा प्रॉफिट हो सकता है। लेकिन आज मैं आप लोगों को एक बहुत ही इंट्रेस्टिंग चीज़ बताता हूँ जो आप लोगों ने शायद कभी नहीं सुनी होगी।

तो ब्लोग के स्टार्ट में जो मैंने राकेश झुनझुनवाला का टाइटन कंपनी का एग्जाम्पल लिया था, जिसमें उसने 2003 में इन्वेस्ट किया था। ऐक्चुअली में उस कंपनी का शेयर 2003 में ₹3 का नहीं था, उसका एक्चुअल प्राइस 60 या ₹70 के आसपास था। जैसा कि आप इस कंपनी की ऐनुअल रिपोर्ट में खुद देख सकते हो,

अब आप मे से बहुत लोग यहाँ पे कन्फ्यूज़ हो सकते हो कि ऐसा कैसे हो सकता है ? हमें तो गूगल के प्राइस चैट पे दिख रहा है की इसका स्टॉक प्राइस वो टाइम पे सिर्फ ₹3 का था।

इन फैक्ट मैंने अपने ये वाले ब्लोग में ITC के शेयर का एक रियल एग्जाम्पल मेन्शन किया था जिसमें एक इन्वेस्टर ने 2004 में आइटीसी के 1000 शेयर्स खरीदे थे। तो मैंने कहा था कि ITC का एक शेर वो टाइम पे ₹1000 के आसपास मिल रहा था,

लेकिन अगर आप इसका भी प्राइस चार चेक करोगे तो आप देख सकते हो। इसका प्राइस वो टाइम पे ₹2025 के आसपास था तो इसीलिए बहुत सारे लोगो ने मुझे कमेंट करके भी कहा था की सर हम इसका लाइव चार्ट देख सकते हैं। हमें तो इसका प्राइस कुछ और ही दिख रहा है।

स्टॉक स्प्लिट क्या होता है ?

इन्फैक्ट ITC का शेयर प्राइस ₹1000 का तो कभी हुआ ही नहीं है तो दोस्तों इसकी वजह यह है कि कंपनी अपने शेयर्स को स्प्लिट कर देती है जिसको हम स्टॉक स्प्लिट कहते हैं। अब इसमें होता ये है कि कंपनी अपने शेयर्स को कुछ हिस्सों में ब्रेक कर देती है।

इसको हम थोड़ी देर में बहुत ही डिटेल में समझने वाले लेकिन उससे पहले हम ये समझने की कोशिश करते हैं कि कंपनी ऐसा करती क्यों है और यह हमारे लिए इतना इम्पोर्टेन्ट क्यों है?

तो कंपनी स्टॉक्स स्प्लिट इसलिए करती है क्योंकि वो चाहती है कि जनरल पब्लिक उनके शेयर्स में इन्वेस्ट करे क्योंकि अगर कोई कंपनी का स्टॉक बहुत ज्यादा महंगा हो जाएगा जैसे लाखों रुपए का तो जिन लोगों के पास सिर्फ कुछ ₹1000 इन्वेस्ट करने के लिए वो तो उसमें इन्वेस्ट कर ही नहीं पाएंगे।

जैसे अगर आप वॉरेन बफे की कंपनी बर्कशायर हैथवे एक एग्जाम्पल देखो तो इसका एक शहर का प्राइस फिलहाल 4,35,000 यूएस डॉलर्स है। मतलब एक शहर इंडियन रूपीस के हिसाब से ऑलमोस्ट 3,00,00,000 रुपयों का है तो वो बफे ने अपनी कंपनी के शेयर्स को कभी किया ही नहीं है।

क्योंकि यूएसए में फ्रैक्शनल शेर जबी करने का ऑप्शन होता है, जिसका मतलब यह है कि आप किसी कंपनी में $1 भी इन्वेस्ट कर सकते हो। भले ही उसका शेयर प्राइस कितना भी महंगा हो।

तो अगर आपको बर्कशायर हैथवे मैं $1 इन्वेस्ट करना हैं तो आपको उस कंपनी का एक शहर का ज़ीरो पॉइन्ट 0000000.1 समथिंग हिस्सा मिलेगा। तो इसीलिए वॉरेन बफेट ने अपने स्टॉक्स का कभी स्प्लिट किया ही नहीं है क्योंकि उससे उनको कुछ फायदा होता ही नहीं है।

लेकिन इंडिया में ये फ्रेशनल शेर बाइंग करने का ऑप्शन है ही नहीं। तो अगर आपको Nestle  का शेयर खरीदना है और आपके पास ₹10,000 है तो आप इस कंपनी के शेयर खरीद सकते ही नहीं हो।

इसीलिए इंडिया में अच्छी कंपनी उसको बार बार अपने स्टॉक्स को करते रहना पड़ता है ताकि उनके शहर का जो प्राइस है वो अफोर्डेबल रेंज में रह सके। मतलब कुछ ₹1000 के आस पास,

स्टॉक स्प्लिट काम कैसे करता है,

इसका हम एक सिंपल एग्जाम्पल देखते है। इमेजिन करो एक छोटी सी कंपनी है जिसने सिर्फ 100 शेयर्स लोगों में इश्यू करके रखें। मतलब इसके 100 शेयर्स आउटस्टैंडिंग है और उसके हर एक शहर का प्राइस ₹1000 है।

तो इस हिसाब से इस कंपनी के सारे शेयर खरीदने के लिए मतलब कंपनी को पूरा खरीदने के लिए आपको ₹1,00,000 पे करना पड़ेगा, क्योंकि आप ₹1000 से सारे शेड्स मतलब 100 शेयर्स खरीद लोगे तो वो होता है

₹1,00,000 का इन्वेस्टमेंट। तो इस ₹1,00,000 को हम मार्केट कैप कहेंगे यानी पूरी कंपनी की मार्केट वैल्यू अब मानलो आपने 10 साल पहले इस कंपनी का सिर्फ एक ही शहर खरीदा और आज 10 साल के बाद ये कंपनी ग्रो हो गई और इसका शहर का प्राइस इन्क्रीज़ हो कर ₹20,000 का हो गया।

मतलब 20 गुना ऊपर चला गया। इसका मतलब यह है कि कंपनी की मार्केट वैल्यू भी ₹1,00,000 से इन्क्रीज़ होकर 20,00,000 की हो गई क्योंकि एक कंपनी 20 गुना ग्रो हो चुकी है। लेकिन अब कंपनी को लगता है कि यह ₹20,000 जो इसका शेयर प्राइस है वो बहुत एक्स्पेन्सिव हो चुका है।

बहुत लोग इसे अफोर्ड नहीं कर सकते तो कंपनी के मैनेजमेंट ने डिसाइड किया की वो स्टॉक स्प्लिट करेंगे। तो मान लो ये कंपनी के मैनेजमेंट ने 1:10 का स्टॉक स्प्लिट किया तो इससे होगा ये की पहले आपके पास कंपनी का सिर्फ एक ही शहर था ₹20,000 का, लेकिन अब आपके पास 10 शेर हो जाएंगे क्योंकि कंपनी ने आपको एक शहर के बदले 10 शेर दे दिए।

पहले आपके पोर्टफोलियों की वैल्यू ₹20,000 की थी और एक शहर का प्राइस ₹20,000 था, लेकिन अब हर एक शहर का प्राइस ₹2000 का हो जायेगा और आपका पोर्टफोलियों अभी भी ₹20,000 का ही रहेगा।

मतलब आपके हर एक स्टॉक का प्राइस नीचे गिरकर ₹2000 का हो जाएगा और जहाँ हम बात करे कंपनी की तो स्टॉक स्प्लिट से पहले कंपनी की मार्केट वैल्यू थी 20 लाख की और इसके 100 शेयर्स मार्केट में थे। लेकिन अब स्टॉक स्प्लिट के बाद कंपनी के टोटल 1000 शेर हो जाएंगे।

मतलब ये भी 10 गुना बढ़ जाएंगे और इससे भी कंपनी की मार्केट वैल्यू नहीं इन्क्रीज़ हो गई। अब दोस्तों बहुत लोगों को लगता है कि स्टॉक स्प्लिट से या बोनस शेर से या स्टॉक डिविडेंड से आपको एक्स्ट्रा पैसे मिलते, लेकिन ऐसा नहीं होता है।

जब तक कंपनी की मार्केट वैल्यू इन्क्रीज़ नहीं होगी तब तक आपके पोर्टफोलियों की वैल्यू इन्क्रीज़ नहीं होगी। तो कंपनी को सिर्फ स्टॉक स्प्लिट से पहले खरीद के रख लेने से आपको कुछ एक्स्ट्रा फायदा नहीं होगा। आपको कंपनी को लॉन्ग टर्म के लिए होल्ड करके रखना पड़ेगा।

जब कोई कंपनी का IPO निकलता है।

जब तक कंपनी ग्रो हो रही है तो दोस्तों अगर आप थोड़ा गौर करोगे तो आपको पता चलेगा कि जब कोई भी कंपनी का IPO  निकलता है। मतलब पहली बार कोई कंपनी अपने शेयर्स को पब्लिक में इश्यू करती है तो उसका शेयर प्राइस अक्सर ₹100 से कुछ ₹1000 के बीच में होता है,

जैसे एसबीआइ कार्ड्स का आइपीओ के टाइम शेयर प्राइस ₹750 का था, बारबेक्यू नेशन का IPO के टाइम पे ₹500 का शहर था और इन्डिगो पेंट्स का IPO  के टाइम ₹1500 का स्टॉक था। तो कोई भी कंपनी IPO के टाइम पे अपने शहर का प्राइस दो रूपया ₹5 नहीं रखती है। तो सवाल ये उठता है कि

जब कोई कंपनी अपने IPO में अपने स्टॉक का प्राइस ₹100 से स्टार्ट करती है और उसका स्टॉक प्राइस गिर के ₹2 का हो जाता है ? मतलब एक पैनी स्टॉक बन जाता है तो वो स्टॉक इतना नीचे गिरता कैसे है ? क्योंकि मार्केट क्रैश में भी स्टॉक मार्केट ज्यादा से ज्यादा 50%-60% या 70% नीचे गिरता है?

फिर चाहे रिसेशन आ जाए या COVID 19 आ जाए या वल्ड वोर हो जाए, मार्केट हमेशा 50%-60% ही गिर थे है लेकिन यहाँ पैनी स्टॉक्स 99% नीचे गिर जाते हैं। तो दोस्तों इससे हमें ये चीज़ पता चलती है कि इतना कम प्राइस किसी भी स्टॉक का तब होता है वो कंपनी बहुत ज्यादा बुरी सिचुएशन में पढ़ती है।

जैसे या तो कंपनी कोई फ्रॉड केस में पकड़ी गईं उनके प्रोमोटर्स भाग चूके हैं या फिर कंपनी का पूरा बिज़नेस मॉडल ही खराब हो चुका है या उसके बैलेंस शीट में सिर्फ करोड़ों के लोन भरना बाकी है। मतलब इन शोर्ट ऐसी कम्पनीज़ जो आप बहुत ज्यादा रिस्की हो चुकी है तो जब आप स्टॉक मार्केट में न्यू होते हो और आपके पास थोड़ा सा पैसा है और आपको बिज़नेस को ऐनालाइज करने का इतना एक्सपिरियंस नहीं है

और आपने अभी तक अपनी लाइफ में FD के अलावा कहीं पे इन्वेस्ट किया ही नहीं है तो आपको रिस्क ज्यादा लेना चाहिए या कम। लेकिन उससे प्रॉब्लम ये होती है। के रिस्क के बारे में कोई बात करता ही नहीं है और सबसे बड़ी प्रॉब्लम ये है की आपको सही तरीके से गाइड करने वाले लोग मिलेंगे ही नहीं,

क्योंकि 90% लोगों को स्टॉक मार्केट की इतनी नॉलेज होती ही नहीं है और बाकी 10% जिनको नॉलेज होती है वो तो सिर्फ अपना ही सोचते है क्योंकि अगर आप एक सिंपल सा यूट्यूब सर्च करोगे तो आप खुद देख सकते हो। हॉट स्टॉक्स और पैनी स्टॉक्स के ऊपर आपको हज़ारों ब्लोग देखने मिलेंगे।

कुछ यूट्यूबर्स तो ऐसे जो हर रोज़ पांच नए मल्टीबैगर स्टॉक्स के ऊपर ब्लोग अपलोड करते रहते हैं और उनके वीडिओज़ पर लाखों व्यूज आते रहते हैं तो ऐसे काम करके ये लोग तो कन्टिन्यूसली पैसा कमा रहे हैं।

लेकिन इनके रिकमेन्डेशन्स पे आप पैसा कमा पाओगे या नहीं या फिर आप अपने कैपिटल को प्रोटेक्ट भी कर पाओगे या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं है।

इसीलिए हमें यह जानकर सरप्राइज़ होने की जरूरत नहीं है कि मैक्सिमम न्यू इनवेस्टर्स स्टॉक मार्केट में लॉस क्यों लेते हैं? और जब सारे न्यू लॉस लेते रहते तो प्रॉफिट कमाता कौन है? तो दोस्तों, ये वही थोड़े से सेंसिबल इन्वेस्टर्स होते,

जो अच्छी Quality की कंपनी में इन्वेस्ट करके अपनी वेल्थ कन्टिन्यूसली ग्रो करते रहते हैं और सारा प्रॉफिट वो थोड़े से लोग लेके जाते है उनकी नॉलेज और कंपाउंडिंग की वजह से तो दोस्तों अब मैं आप लोगों को इसका एक लाइव एग्ज़ैम्पल दिखाता हूँ।

न्यू इन्वेस्टर स्टॉक मार्केट में लॉस क्यों लेते ?

हम ये समझते हैं कि जब कोई कंपनी का स्टॉक ऑलरेडी 10 ₹20,000 का है तो वो और कितना बढ़ सकता है या फिर कोई कंपनी का स्टॉक अगर ₹2 का है तो और कितना गिर सकता है?

तो यहाँ पे हम टिकट टिप का यूज़ करते हैं, जहाँ से आप स्टॉक्स को काफी आसानी से फिल्टर कर सकते हो और उसके फंडामेंटल्स कोई ज़मीं ऐनालाइज भी कर सकते हो तो यहाँ पे हम दो कंपनी के एग्जाम्पल लेते हैं

जो सिर्फ एजुकेशनल पर्पस के लिए है तो 5 साल पहले ये कंपनी का शेयर प्राइस ₹6000 का था और आज ये ₹17,000 का हो गया है तो 5 साल पहले भी ये ₹6000 एक बड़ा इन्वेस्टमेंट था और आज ये 17,000 भी एक बड़ा इन्वेस्टमेंट है

क्योंकि अगर आप इस कंपनी का फाइनैंशल ट्रेंड देखोगे तो आप खुद देख सकते हो की ये कंपनी कन्टिन्यूसली अपना रेवेन्यू और प्रॉफिट इन्क्रीज़ करती जा रही है।

लेकिन जो कंपनी का स्टॉक प्राइस आज से 5 साल पहले सिर्फ ₹15 का था, वो आज ₹5 का हो गया है, क्योंकि ये कंपनी का लॉस कन्टिन्यूसली इन्क्रीज़ होता जा रहा है। तो जो स्टॉक इतना सस्ता है,

उसके अपने फन्डामेंटल रीज़न होते और आप यहाँ पे सामने ही देख सकते हो कि एक कंपनी को कितना बड़ा लोन भरना बाकी है, लेकिन यहाँ पे नैस्ले कंपनी का टोटल डेट उसकी इक्विटी के मुकाबले बहुत कम है।

मुफ्त नहीं के बराबर तो अगर कोई ये पैनी स्टॉक में आज इन्वेस्ट करता है, ये सोच के की ऑलरेडी इतना कम हो चुका है और कितना निधि जाएगा? और अगर ये स्टॉक ₹5 से ₹1 का हो जाता है तो भले ही ये स्टॉक पहले से ही 96% नीचे गिर गया हो लेकिन आज जो इसमें इन्वेस्ट करेगा उसके लिए

ये और 80% का लॉस होगा और अगर वो स्टॉक ₹1 से 50 पैसे का होता है तो उसे वहाँ से और 50% का लॉस होगा। तो इसीलिए एक चीज़ मैं हमेशा कहता हूँ कि जब भी आप स्टॉक में इन्वेस्ट करते हो तो आप स्टॉक्स में नहीं

बल्कि उसके बिज़नेस में इन्वेस्ट करते हो तो भले ही आप ₹10,000 इन्वेस्ट करके किसी कंपनी का 50 शेयर्स लेते हो या उतनी ही पैसों से एक शेयर खरीदते हो उससे फर्क नहीं पड़ता है।

क्योंकि अगर ये दोनों कंपनी लॉन्ग टर्म में 15% के रेट से ग्रो होती है तो दोनों ही केस में आपको अपने इन्वेस्टमेंट पे 15% का ही रिटर्न मिलेगा। तो ज्यादा शेयर्स खरीद के रख लेने से आपको एक्स्ट्रा रिटर्न नहीं मिलने वाला।

अलटिमेटली तो कंपनी की एक्चुअल ग्रोथ ही मैटर करेगी। इसी लिए जब आप अपने आपको क्वेश्चन पूछते हो कि ये ऑलरेडी इतना सस्ता हो गया है और कितना नीचे जा सकता है तो आप हमेशा गलती करोगे

क्योंकि आप अपने आप से सवाल ही गलत कर रहे हो। सही सवाल ये होगा कि वो बिज़नेस फ्यूचर में क्या करेगा? कितने रेट से ग्रो होगा और अगर आपको ये चीज़ नहीं पता तो आपको एक बार उसका इनवेस्टर प्रेजेंटेशन पढ़ना चाहिए।

कंपनी की रिपोर्ट या उसके फाइनैंशल्स को रीड कर लेना चाहिए या फिर ऐसे स्क्रीन घर पे आके अपना एक बार 5 मिनट इन्वेस्ट करना चाहिए उसकी डिटेल्स को रेड करने के लिए और अगर आप ऐसा करते हो तो भी आपको पता चल जाएगा कि वो स्टॉक इतना नीचे क्यों जा रहा है और आप अपना लाखों का लॉस बचा सकते हो और

दोस्तों अगर आप अपने स्टॉक अनैलिसिस को एक कदम आगे ले जाना चाहते हो तो आप इस के प्रो वर्जन के लिए भी सब्सक्राइब कर सकते हो। जहा से आप को और ज्यादा इन्फॉर्मेशन रेडिमेड मिल जाती है और आप कंपनी की डिटेल्स को डाउनलोड करके डिटेल अनैलिसिस कर सकते हो।

वहाँ जाकर उसे चेक कर सकते हो और अगर आपको स्टॉक्स खरीदने के लिए डीमैट अकाउंट ओपन करना है तो उसका लिंक भी आपको नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगा।

तो दोस्तों उम्मीद करता हूँ आपको इस ब्लॉग से कुछ ना कुछ सीखने जरूर मिला होगा और ये भी पता चल गया होगा कि न्यू इनवेस्टर्स स्टॉक मार्केट में अक्सर लॉस क्यों लेते?

क्योंकि सिर्फ स्टॉक के प्राइस को देखकर शेयर खरीद लेना इन्वेस्टिंग नहीं होता है। तो दोस्तों आज के ब्लॉग में इतना ही अगर आप ऐसे वैल्युएबल ब्लॉग देखते रहना चाहते हो Follow Groww Investing अब मुझे नीचे कमेंट करके बताना कि मैं कौन से टॉपिक पे अपना अगला ब्लॉग बनाओ आपका वैल्युएबल टाइम देने के लिए थैंक यू ऐंड गुड बाए.

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