Stock Market In Simple Language

दोस्तों 1 दिन साहिल और उसके फैमिली मेंबर्स अपने घर के गार्डन में बैठे हुए थे। साहिल हमेशा की तरह अपने फ़ोन में कुछ फनी विडियोज देख रहा था और उसके दादाजी न्यूज़ पेपर में करेंट अफेयर्स पर रहे थे
जहाँ उनकी नजर उनकी सबसे फेवरेट टॉपिक पर पड़ती है, जो हैं शेयर बाज़ार उसमें लिखे हुए बाजार के उतार चढ़ाव के बारे में पढ़कर वो खुद से ही स्माइल करने लगे तो उसी वक्त फाइल का स्कूल फ्रेंड रॉकी वहाँ पहुंचता है
और उन्हें ऐसे हँसते हुए देख के उनसे पूछता है की वो ऐसा मन लगा कर क्या पढ़ रहे हैं? इस पर दादाजी कहते है की बेटा हमे शेयर बाजार के बारे में पढ़ा हूँ। जब तुम बड़े हो जाओगे।
तो मैं तुम्हें इसके बारे में जरूर बताऊँगा। तब रॉकी कहता है की नहीं नहीं, मुझे अभी जानना है। तब दादू मुस्कुराते हुए कहते हैं कि बेटा जब भी मैं शेयर बाजार के बारे में पढ़ता हूँ तब मुझे उस स्टॉक एक्स्चेंज में होने वाले शोर, स्टॉक्स खरीदना और बेचना वो सभी पुराने दिन याद आते हैं
और साथ ही साथ मुझे उस दोस्त की याद दिलाते जो ये स्टॉक मार्केट के बारे में मेरे से भी ज्यादा शौकीन था। लेकिन अनफारचुनेटली वो इस बाजार से कुछ खास प्रॉफिट नहीं कमा पाया। अब रॉकी और ज्यादा इंटरेस्टेड हो गया और उनसे पूछने लगा कि आपने और आपके दोस्त ने इस बाजार को कैसे समझा और आपने यहाँ से इतना प्रॉफिट कमाया कैसे? तब वो कहने लगे
ये बेटा ये शेयर बाजार एक परिवार की तरह होता है। यहाँ आप कुछ कंपनीस के साथ कुछ रिश्ते जोड़ते हों फिर इसमें भी आपको काफी सारे उतार चढ़ाव देखने मिलते हैं और कभी कभी वो टूट भी जाते पर जो इन रिश्तों को अच्छे और बुरे वक्त में संभल के निभाए वहीं अंत तक साथ में रहते हैं और सफल होते हैं।
अब रॉकी को ये बात बिल्कुल भी समझ नहीं आती है क्योंकि वो अभी फिफ्थ स्टैंडर्ड में इसलिए वो उनसे कहता है की प्लीज़ मुझे एकदम सिंपल लैंग्वेज में समझाओ।
इस पर वो कहते हैं कि उन्होंने 2001 में पिडिलाइट इंडस्ट्रीज जो एक कंपनी है, उसके 10,000 शेयर्स खरीदे थे जो कि उस वक्त ₹80 पर शहर के प्राइस पर सेल हो रहा था।
लेकिन अभी वो कंपनी की एक शहर की वैल्यू ₹2400 के ऊपर हो गई है, जिसकी वजह से उनके ₹80,000 के इन्वेस्टमेंट की वैल्यू अब ऑलमोस्ट 2,50,00,000 की है और दूसरी तरफ उनके क्लोज़ फ्रेंड है जो उस टाइम पे उनसे ज्यादा अर्न करते थे। उन्होंने भी ये समे कंपनी में इन्वेस्ट किया था,
लेकिन आज वो अपने बेटे की सैलरी पे डिपेंडेंट है। ना उनके पास कोई प्रॉपर्टी है और ना ही कोई शेर। स् तंभ लगा। ऐसा क्यों? तब वो कहते है की उनके फ्रेंड ने स्टॉक्स खरीद तो लिए थे लेकिन उसमें इन्वेस्ट नहीं किया था। मतलब उनके फ्रेंड ने बस दूसरों की सुनके स्टॉक्स खरीद लिए थे।
और बहुत ही जल्द दैनिक करके उसे सेल कर दिया। क्योंकि स्टॉक मार्केट में जो भी शेयर खरीदता है, उसे हम इन्वेस्टर बोल तो देते लेकिन ऐक्चूअली में इन्वेस्टर वो होता है जो कंपनी के फंडामेंटल्स को समझ के उसके शेड्स को बाइक करें और अंत में वही यहाँ से वेल्थ क्रिएट करता है। तो इसीलिए दोस्तों आज हम रॉकी और दादाजी की स्टोरी से कंपनी को ऐलिस करने के कुछ सिंपल स्टेप्स सीखेंगे। एकदम सिंपल लैंग्वेज में जो कोई भी एक फिफ्थ स्टैंडर्ड का स्टूडेंट भी समझ पाएगा ताकि आप इस वीडियो को अपने दादाजी से लेके फिफ्थ स्टैंडर्ड के छोटे भाई के साथ भी शेयर कर सकते हो तो दादाजी ने रॉकी से कहा
कि जब मैं स्टॉक मार्केट में न्यू था तो मैं कुछ ऐसे स्टॉक्स ढूंढता था जिसका प्राइस एकदम कम हो ताकि मैं वैसे बहुत सारे शेयर्स खरीद सकूँ और जब उनका प्राइस बढ़ जाये तो मैं उसे बेचकर प्रॉफिट कमा लूँ। लेकिन ऐसे माइंड सेट से मैंने हमेशा लॉस लिया और मेजोरिटी लोग आज भी स्टॉक मार्केट में यही करते हैं। इसलिए स्टॉक मार्केट इतना बदनाम है क्योंकि असलियत में हमें थोड़ा सा अलग माइंड सेट चाहिए होता है। तो इसीलिए बेटा आप मुझे एक सवाल का जवाब दो मान लो आज तुम्हारे पास ₹1,00,00,000 है और तुम उसे किसी एक कंपनी में इन्वेस्ट करते हो, जैसे इमेजिन करो, किसी फुटवियर कंपनी में और उसके बदले तुम्हें 50% शेर ओनरशिप मिल रही है।
मतलब तुम उस कंपनी के आधे मालिक बन रहे हो तो तुम उस कंपनी से क्या एक्सपेक्ट करोगे तो रॉकी कहता है, मैं चाहूंगा कि उस कंपनी से मुझे अच्छा रिटर्न मिले। जैसे अगर मैं अपना पैसा किसी बैंक में डिपॉजिट करता हूँ तो उसमें मुझे 5-6 परसेंट का रिटर्न मिलता है तो मैं उससे ज्यादा एक्सपेक्ट करूँगा। यानी हर साल 1,00,00,000 पे पांच से ₹6,00,000 से ज्यादा और इसके साथ ये कंपनी फ्यूचर में ग्रो होनी चाहिए, तो कंपनी की जो भी फ्यूचर प्लेन्स है मुझे वो पता होना चाहिए। तो दादाजी रॉकी के इस जवाब से काफी खुश हुए और कहने लगे कि देखो यहाँ तो तुमने बहुत ही अच्छी सोच रखी। कंपनी से अच्छे रिटर्न्स कमाने के लिए और फ्यूचर ग्रोथ के लिए
तो यही बात तुम स्टॉक मार्केट में क्यों नहीं करते? क्योंकि चाहे ओनरशिप 50% की हो या 5% की या फिर ज़ीरो पॉइन्ट 0005% की, भले ही आपके पास आज ₹1,00,00,000 नहीं है। जब मैंने अपनी कॉलेज की डिग्री खत्म की थी तो मेरे पास भी नहीं थे, लेकिन आज मेरे पास मल्टीप्ल स्टॉक्स में करोड़ों के इन्वेस्टमेंट से ये इसीलिए पॉसिबल हुआ क्योंकि मैंने पहले ही एक लॉन्ग टर्म माइंडसेट रखा। वेल्थ क्रिएशन पर फोकस किया ना की छोटे मोटे प्रॉफिट्स पे। तो इसीलिए सबसे पहले सन आपके लिए ये है की जब भी आप किसी स्टॉक में इन्वेस्ट करने का सोचते हो या फिर स्टॉक मार्केट में एंटर करते हो तो भले ही आप किसी कंपनी का सिर्फ
एक शेयर खरीदते हो, आप ये सोचो कि मैं उस कंपनी को धीरे धीरे करके पूरा बी कर लूँगा तो वो कंपनी इतनी अच्छी होनी चाहिए। क्या आप ऐसी बात लेते हो की वो फ्यूचर में उससे भी ज्यादा और स्ट्रॉन्ग होती रहे? फिर रॉकी पूछता है, परदादा जीस जरूरी नहीं है की इस फुटवियर कंपनी से रिटर्न हमे अच्छा मिले। ये भी तो हो सकता है कि हमें लॉस हो और मुझे पता चलेगा कैसे है की ये कंपनी फ्यूचर में ग्रो होती रहेंगी? तब दादाजी कहते की बेटा ये बात तो सही है। इसीलिए किसी के फ्यूचर को समझने के लिए हमें उसके पास्ट को समझना होगा। जैसे इमेजिन करो के किसी कॉलेज के कैंपस में
बड़ी बड़ी कंपनीज वाले आते हैं, कुछ स्टूडेंट्स को जॉब देने के लिए, लेकिन उसमें इंटरव्यू के लिए 50 लोग है और कंपनी को सिर्फ पांच ही स्टूडेंट्स को जॉब देना है तो कंपनी की एचआर क्या करेगी? तब रॉकी कहता है की वो शायद स्टूडेंट्स के मार्क्स चेक करेंगे। एग्ज़ैक्ट्ली आपके मार्क्स से कंपनी के एचआर को ये पता चलेगा क्या आप कितने हार्ड वर्किंग हो और कितने सिनसिअर हो? फ्यूचर में आप कैसा काम करोगे ये तो फ्यूचर में ही पता चलेगा, लेकिन फिर भी फास्ट परफॉर्मेंस से हमें फ़्यूचर का एक काफी अच्छा खासा आइडिया मिल जाता है। तब रॉकी कहता है की इसका मतलब यह हुआ कि जिन स्टॉक्स का प्राइस पास्ट में काफी ऊपर गया है
तो हमें उन में इन्वेस्ट करना चाहिए। राइट तब दादाजी ज़ोर से हंसने लगे और कहते है की बेटा, स्टॉक प्राइस और कंपनी का ऐक्चुअल परफॉरमेंस। ये दोनों अलग चीजें होती है। कभी कभी ऐसा भी होता है इन्फैक्ट कभी कभी नहीं। बहुत बार की कंपनी कुछ खास परफॉर्मेंस दे नहीं रही है, लेकिन फिर भी उनका स्टॉक प्राइस ऊपर जाता रहता है और अगर आप वैसे स्टॉक में इन्वेस्ट कर लेते हो तो आप बहुत बड़ी मुसीबत में फंस सकते हो, क्योंकि बहुत ही जल्द वै सी कंपनी का स्टॉक प्राइस कनेक्ट होता है और इसीलिए लोग ज्यादातर बड़े बड़े लॉस लेते हैं क्योंकि वो स्टॉक के प्राइस को देखकर ही इनवेस्ट करते हैं। तो इसीलिए
दोस्तों आप लोगों के लिए लेसन नंबर टू ये है की स्टॉक प्राइस कंपनी के परफॉर्मेंस का एक प्रॉपर इंडिकेटर नहीं होता है और पास परफॉरमेंस भी फ्यूचर की गैरैन्टी नहीं देता है तो सिर्फ स्टॉक प्राइस को देख के किसी कंपनी में इन्वेस्ट कर लेना इन्वेस्टिंग नहीं होता है। तो इसीलिए कंपनी के पास्ट को समझने के लिए हमें उसके बेसिक फंडामेंटल्स को ऐनालाइज करना होगा, जिसके लिए आज कल हम स्टॉक्स यूज़ कर सकते हैं। हमारे जमाने में हमें फाइनैंस, न्यूस पेपर्स और जनरल्स के हर एक पेपर को रेड करना होता था। तब जाकर हमें कोई अच्छी कंपनी मिलती थी। लेकिन आजकल टेक्नोलॉजी की वजह से आप लोगों का काम काफी आसान हो गया है।
लेकिन फिर भी लोग स्टॉक मार्केट से लॉस लेते रहते। क्योंकि जैसे जैसे टेक्नोलॉजी इम्प्रूव होती है तो नॉलेज और इन्फॉर्मेशन के साथ डिस्ट्रैक्शन भी उतने बढ़ते रहते हैं।
तो आपको राइट इन्फॉर्मेशन पे फोकस करना है जिसके लिए आज मैं आपकी मदद करता हूँ तो अभी हम ये वेबसाइट टिकट.इन पे जाते है। हम इसके ड्रॉपडाउन पे क्लिक करेंगे, फिर स्टॉक्स किन्नर पे तो अभी ये हमें इंडिया की सारी पब्लिक कंपनी का नाम शो करेगा और जो कंपनी सबसे ऊपर है
वो इंडिया की सबसे बड़ी कंपनी है जैसे रिलायंस टॉप पे क्योंकि इनका मार्केट कैप यानी टोटल वैल्यू 18,00,000 करोड़ की है तो यहाँ पे मैं एग्जाम्पल के लिए
एक रैन्डम कंपनी लेता हूँ जैसे वही पे डिलाइट इंडस्ट्रीज़ कोई स्टॉक रिकमेन्डेशन नहीं है ये सिर्फ एजुकेशन पर्पस के लिए तो किसी भी स्टॉक में इन्वेस्ट करने के लिए आपको चार चीजों पे फोकस करना होता है। एक है बिज़नेस मैनेजमेंट वैल्यूएशन और नंबर्स।
तो सबसे पहले ये बिज़नेस अब हो सकता है कि ये कंपनी का नाम शायद आप मेरे से बहुत लोगो ने नहीं सुना हो। पर जो चीजें कंपनी सेल करती है उसका नाम सब ने सुना होगा। बच्चों ने भी जैसे फेविकोल
या फिर रंगीला कलर्स तो जब मैंने इस कंपनी में इन्वेस्ट किया तो सबसे पहले मैंने इसके बिज़नेस को समझने की कोशिश की। मैंने देखा कि किस तरह एक कंपनी ऐसे प्रोडक्ट्स सेल करती है जो पहले सिर्फ हार्ड्वेर पे मिलते थे,
लेकिन अब हर एक घर में पाए जाते हैं तो सबसे पहले मैंने इनके प्रॉडक्ट की क्वालिटी चेक की। जैसे पिडिलाइट का सबसे फेमस प्रॉडक्ट है फैविकोल तो आज से काफी सालों पहले जब कारपेंटर्स को ग्लू की जरूरत होती थी,
फर्निचर में लगाने के लिए तो उन्हें काफी स्ट्रगल करना पड़ता था। वो ग्लू ऐनिमल के फैट को जलाने से बनता था क्योंकि बहुत ज्यादा टाइम कोन्सुमिंग था और अनहेलथी भी।
और साथ ही साथ बहुत ही गिनी चुनी शॉप्स में वो अवेलेबल होता था। तो के फाउंडर बलवंत पारेख जी ने इसको एक अपॉर्चुनिटी समझा और उन्होंने एक बढ़िया प्रॉडक्ट लॉन्च किया, जिसका नाम था फेविकोल और फिर कारपेंटर्स के कन्टिन्यूअस।
फीडबैक की मदद से उन्होंने इस प्रॉडक्ट की क्वालिटी को काफी ज्यादा स्ट्रांग बना दी और उसके बाद उन्होंने बढ़िया मार्केटिंग कैंपेन की मदद से एक सही मैसेज लोगों तक पहुंचाया और फिर यह कंपनी पिछले 60 साल से इस कैटगरी की मार्केट लीडर है।
फिर इसके बाद हमें ये देखना होगा कि बिज़नेस किस तरह ग्रो हो रहा है तो ये कंपनी बहुत सारे न्यू प्रोडक्ट्स लॉन्च करती रहती हैं। जैसे डॉक्टर फिक्सइट जो दीवारों के लिए होती है।
या फिर फेविक्विक जो एक सुपर फास्ट गम है या फिर अलग अलग तरह के फेक कॉल्स और इनके ऐसे बहुत सारे दूसरे ब्रैन्डस है जो सब अपनी कैटेगरी में नंबर वन पे तो इसीलिए इन्वेस्टिंग करने का लेसन नंबर थ्री है
कि किसी भी स्टॉक में इन्वेस्ट करने से पहले आपको उसके बिज़नेस यानी उसके प्रोडक्ट्स सर्विस, उनके कॉंपिटिटर्स और उनकी पोज़ीशन के बारे में पता होना चाहिए की वो कंपनी अभी कहाँ स्टैंड करती है और फ्यूचर में कहाँ हो सकती है और अगर आपको ये भी नहीं पता की वो कंपनी बिज़नेस करती क्या है तो वो क्लियरली गैम्ब्लिंग होता है। फिर इसके बाद नेक्स्ट पॉइंट है। मैनेजमेंट
इसका मतलब यह है कि कंपनी को हम जैसे लोग ही रन करते हैं, जो कंपनी के एंप्लॉयीज, डायरेक्टर और मैनेजर होते। अब कुछ लोग स्मार्ट होते हैं, कुछ लोग इतने स्मार्ट नहीं होते, कुछ लोग हॉनेस्ट होते और कुछ लोग डिस होनेस्ट तो हमें यही पता लगाना है कि कंपनी के मैनेजमेंट के लोग कैसे हैं? तो क्या आपने कभी फेविकॉल के ऐड देखे? इनके ऐड्स काफी एंटरटेनिंग और टु पॉइंट होते हैं,
जिससे आपको क्लियरली पता चलेगा की इनका मैनेजमेंट कितना क्रिएटिव और फोकस्ड है और जीस तरह किसी भी इंसान के लिए पर्सनल लेवल पे सेविंग्स इम्पोर्टेन्ट होती है। जो लोग सेविंग और इन्वेस्टिंग करते तो उन्हें हम फाइनली स्मार्ट कहते हैं।
उसी तरह बिज़नेस के लिए भी सेव करना और राइट इन्वेस्ट करना जरूरी होता है। तो अगर कोई कंपनी अपने एक्स्पेन्स को कंट्रोल नहीं कर सकती और अपने प्रॉफिट्स कन्टिन्यूसली ग्रो नहीं कर सकती तो वो भी लॉन्ग टर्म में ग्रो नहीं हो सकती।
तो इसीलिए किसी भी स्टॉक में आपको हमेशा ये देखना होता हैं की कंपनी कितना कमा रही है और कितना सेव कर रही है और अपने प्रॉफिट्स को कैसे ग्रो कर रही है। जैसे जीस तरह हम किसी स्टूडेंट का रिज़ल्ट चेक करते तो हम ये देखते की वो कितने मार्क्स लाये वो पास हुआ है या फेल हुआ है।
उसी तरह ये फाइनैंशल स्टेटमेंट में कंपनी का रिज़ल्ट होता है और ये इनकम स्टेटमेंट में हमें ये दिखता है की वो कंपनी कितना प्रॉफिट कमा रही है।
या फिर लॉस और अगर प्रॉफिट कमा रही हैं तो कितना तो अगर कोई स्टूडेंट फिफ्थ में 50% मार्क्स स्कोर करता है और फिर उसके अगले साल सिक्स स्टैंडर्ड में 60% मार्क्स स्कोर करता है। फिर सेवंथ में 70% तो इससे हमे एक चीज़ क्लियरली पता चलती है की वो स्टूडेंट काफी सही डिरेक्शन में जा रहा है
तो इसी तरह बिज़नेस में भी आप कंपनी के इरली रिज़ल्ट चेक कर सकते हो और देख सकते हो की कंपनी इर कैसे ग्रो कर रही है और आप कंपनी को काफी सारे अलग अलग पैरामीटर्स पे भी चेक कर सकते हो। इसी को हम ऐक्चुअल ऐलिस कहते हैं तो यहाँ पे हम 2012 से लेके 2021 तक का इनका रिज़ल्ट ऐनालाइज कर सकते हैं।
जब हम इन सारे फाइनैंशल स्टेटमेंट की कॉम्पोनेंट्स को किसी और दिन डिटेल में समझेंगे लेकिन एक सिंपल टेक्नीक जहाँ से आप मैनेजमेंट की इफिशियंसी चेक कर सकते हो तो वो एक कॉस्ट कटिंग तो इसके लिए हम यहाँ पे ऐन्युअल मार्जिन व्यूस इलेक्ट करेंगे। इससे हमें कंपनी के अलग अलग तरह के मार्जिन्स पता चलते है जैसे एक इम्पॉर्टन्ट कम्पोनेन्ट है। प्रॉफिट मार्जिन इसको हम नेट इनकम मार्जिन भी कहते हैं।
तो अगर आप इन का 2012 का नेट इनकम मार्जिन देखोगे तो ये 10% का था। मतलब कंपनी हर ₹100 के सेल्स पे ₹10 का प्रॉफिट कमा रही थी, लेकिन धीरे धीरे करके ये प्रॉफिट मार्जिन ग्रोथ आ गया और अभी 2021 में
ये 15% के ऊपर है। तो इससे हमें पता चलता है कि कंपनी अपने क्वालिटी को ध्यान में रख के कॉस्ट कटिंग कर रही है और अपने सेल्स को भी ग्रो कर रही है तो ये कंपनी के मैनेजमेंट का एक पॉज़िटिव साइन होता है।
तो इसीलिए लेसन नंबर फ़ोर ये है की आपके बिज़नेस के मैनेजमेंट के बारे में आपको उतनी ही चीजें पता होनी चाहिए जितनी आपको अपने क्लोज़ फ्रेंड के बारे में पता होती है। जैसे उनका कैरक्टर कैसा है?
क्या उन्होंने पास्ट में कभी किसी को चीट किया है और क्या वो कंपनी को रन करने के लिए टेलेन्टेड या कैपेबल है या नहीं? फिर उसको आखिर में जब हम किसी बिज़नेस और मैनेजमेंट को पूरी तरह समझ लेते तो हम कंपनी की वैल्यूएशन पर फोकस करते
मतलब क्या वो कंपनी हमें सस्ते में मिल रही है या नहीं? तब रॉकी कहता है, पर दादा जी ये तो काफी कॉम्प्लेक्स कैलकुलेशन वाला काम लग रहा है। जो लोग मैथ्स में स्ट्रांग नहीं हैं वो लोग इसे कैसे कर सकते हैं?
इस पर दादाजी कहते हैं कि क्या तुम वहाँ चल रहे तीन लोगों में से बता सकते हो कि किसका वजन सबसे ज्यादा है? रॉकी कहता है हाँ वही जो सबसे पहला आदमी जा रहा है उसी का होगा क्योंकि वो दिखने में थोड़ा मोटा लग रहा है। फ्रीर से दादाजी कहते है की ये जरूरी नहीं है की जो मोटा दिख रहा है उसी का वजन ज्यादा हो।
क्या पता वो तीसरा लड़का जिसकी हाइट ज्यादा है उसका वजन ज्यादा हो। इसीलिए हम बीएमआइ यानी बॉडी मास इंडेक्स चेक करते, जहा हम लोग का हाइट और वेट प्रॉपर तरीके से मेजर करते फिर उसको एक फॉर्मूला में अप्लाइ कर के एक नंबर निकालते हैं
जिससे हमें क्लियरली पता चलता है की कौन इंसान उसकी हाइट के हिसाब से ओवर वेट हैं या अंडरवेट? तो इसी तरह वैल्यूएशन में भी हम कुछ फोर्मुले यूज़ कर सकते हैं जहाँ हम क्लियरली पता लगा सकते की कंपनी अंडरवैल्यूड है या नहीं।
लेकिन इन्वेस्ट करने के लिए आपको एग्ज़ैक्ट फॉर्मूला यूज़ करने की जरूरत नहीं है। अगर आप किसी कंपनी को दूर से ही देख के पता लगा लो जैसे हमने उस पहले वाले आदमी को दूर से देखकर पहचान लिया कि उसका वेट सबसे ज्यादा होगा।
तो इसी तरह आपको स्टॉक इनवेस्टिंग में भी कॉम्प्लेक्स कैलकुलेशन करने की जरूरत नहीं है। तो इसीलिए इन्वेस्टिंग काले सर नंबर फाइव ये है की अगर कोई कंपनी बहुत अच्छी है और चीप है तो उसके लिए आपको कैलकुलेशन करने की जरूरत नहीं होगी। आप कंपनी के काफी सिंपल रेशियो को देखकर ही पहचान लोगे की वो काफी अच्छा इन्वेस्टमेंट है
जिसका हम आने वाले विडियोज में काफी डिटेल में समझेंगे। तो अगर आप किसी कंपनी के बेसिक रेशियो उसको देख कर पता नहीं लगा सकते कि वो अंडरवैल्यूड है या नहीं तो आप उसमें इन्वेस्ट करो। ये मत क्योंकि आपको हमेशा अपना एनालिसिस करते वक्त ये देखना है कि क्या कंपनी का डेटा समझने में आसान है?
क्योंकि कंपनी के मैनेजमेंट का ये भी एक इम्पोर्टेन्ट काम होता है की वो अपनी सारी इन्फॉर्मेशन आपको एकदम सिंपल लैंग्वेज में प्रेज़ेंट करें तो अगर आपको एक अच्छा स्टॉक मिलता है तो आपको खुद ही एक कॉन्फिडेन्स मिल जायेगा।
उसमें एक बड़ा अमाउंट इन्वेस्ट करने के लिए जिससे अलटिमेटली आप एक रियल इन्वेस्टर के आओगे ना की कोई पे डिपेंड होता है। तो फाइनली दादाजी रॉकी से कहते की बेटा ये था
एक बेसिक लेवल का इन्ट्रोडक्शन। क्या आपको स्टॉक मार्केट को कैसे देखना चाहिए और अपने इन्वेस्टमेंट को कैसे शुरू करना चाहिए? क्योंकि जैसा वॉरेन बफे ने कहा है तो स्टॉक मार्केट इस डिवाइस टु ट्रांसफर मनी फ्रॉम पेंशन टु पेशेंट तो यहाँ पे
आपको पेशेंट ली अपनी नॉलेज को कन्टिन्यूसली इम्प्रूव करना है, अच्छे स्टॉक्स को ट्रैक करना है और जब वो सही वैल्यूएशन पे मिले तो आपको उसमें लॉन्ग टर्म के लिए इन्वेस्ट करना हैं। तभी आप वेल्थ क्रिएट कर पाओगे। ये गेम काफी सिंपल है लेकिन ईज़ी नहीं है और जब आप इस गेम में थोड़े पुराने हो जाओगे तो आपको पता चलेगा की ये पावर ऑफ कंपाउंडिंग एक रीयल चीज़ होती है
जिसके बारे में हम अगली मीटिंग में काफी डिटेल में डिस्कस करेंगे और ये भी समझेंगे। क्या आप किसी कंपनी का डिटेल ऐलिस इस कैसे कर सकते हो? कुछ रील्स स्टॉक के साथ तो आज के वीडियो में इतना ही उम्मीद करता हूँ कि आपको इस ब्लॉग से कुछ ना कुछ सीखने जरूर मिला होगा।
मैं फ्यूचर में कौन से टॉपिक पे ब्लॉग बनाओ अगर आपको स्टॉक्स में इन्वेस्ट करने के लिए एक इन्वेस्टमेंट अकाउंट ओपन करना है तो घर बैठे बैठे फ्री में अपना अकाउंट ओपन करने की लिंक आपको नीचे डिस्क्रिप्शन में मिल जाएगी आप वहाँ जाके उसे चेक कर सकते ब्लॉग पसंद आया तो उसे लाइक करो नहीं ना पसंद आया तो डिस्लाइक करो आपका वैल्युएबल टाइम देने के लिए थैंक यू ऐंड गुड बाइ

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